अमेरिका में फंसे भारतीयों की होगी ‘घर वापसी’, इस हफ्ते से चालू होंगी स्पेशल फ्लाइटें

कोरोनावायरस (Coronavirus) महामारी के कारण लगाए गए वैश्विक यात्रा प्रतिबंधों की वजह से अमेरिका में फंसे हजारों भारतीयों को निकालने के लिए विशेष उड़ानों के सैन फ्रांसिस्को और अन्य शहरों से इस हफ्ते रवाना होने की संभावना है. अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल किसी तारीख की घोषणा नहीं की गई है. विशेष विमान सैन फ्रांसिस्को, न्यूयॉर्क, शिकागो और वाशिंगटन डीसी से उड़ान भर सकते हैं. कोरोना वायरस महामारी की वजह से लगाए गए यात्रा प्रतिबंधों की वजह से अमेरिका में फंसे भारतीय छात्रों और लोगों की बड़ी संख्या को देखते हुए आने वाले हफ्तों में उड़ानों की संख्या को बढ़ाया जा सकता है.

भारतीय समुदाय के नेताओं ने भारत सरकार के कदम का स्वागत किया. सरकार ने सोमवार को ऐलान किया कि विदेशों में फंसे भारतीय नागरिकों की वापसी के लिए विशेष उड़ानों से मदद की जाएगी जो सात मई से चरणबद्ध तरीके से शुरू होगी. अमेरिका में भारतीय दूतावास और महावाणिज्य दूतावासों ने पिछले हफ्ते स्वदेश लौटने की योजना बनाने वाले भारतीयों की सूची बनाना शुरू की थी. यह फेहरिस्त ऑनलाइन पंजीकरण के माध्यम से बनाई जा रही है.

इस प्रयास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए, जयपुर फुट यूएसए के अध्यक्ष प्रेम भंडारी ने कहा, “यह मेरी स्मृति में पहली बार है कि भारत सरकार अमेरिका से अपने नागरिकों को निकालने के लिए इस तरह का प्रयास करने जा रही है.“ भंडारी को फंसे हुए भारतीयों की कॉलें आ रही थी और वे उन्हें अपनी परेशानियां बता रहे थे। उन्होंने पिछले हफ्ते विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला और नागरिक विमानन सचिव प्रदीप सिंह खरोला को पत्र लिखकर उनका ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित कराया था.

पत्र में उन्होंने कहा था, “बड़ी संख्या में ऐसे छात्र हैं, जिनके पास धन खत्म हो गया है. उनके पास रहने की जगह नहीं है. सबसे चिंताजनक यह है कि इस अनिश्चिता का असर उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत पर पड़ रहा है.“

भंडारी ने अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ को भी पत्र लिखकर मांग की थी कि कोरोना वायरस महामारी से उपजी अप्रत्याशित परिस्थितियों को देखते हुए वीजा अवधि में बढोतरी के लिए लगने वाले 455 डॉलर के शुल्क को माफ किया जाए. पिछले कुछ हफ्तों में कई भारतीयों ने अमेरिका में भारत के राजदूत तरणजीत सिंह संधू से संपर्क कर अपनी परेशानियां बताई थी. साथ में दूतावास द्वारा स्थापित हेल्पलाइन पर भी फोन किया था और जल्द स्वदेश लौटने की मांग की थी.

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