दून विवि में मेरिट के आधार पर होंगे दाखिले

सभी विश्वविद्यालयों में कोरोना संकट के मद्देनजर परीक्षा व शैक्षणिक सत्र से संबंधित छात्रों की समस्याओं को शिकायत निवारण प्रकोष्ठ का गठन करना जरुरी होगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इस प्रकोष्ठ को जरुरी बताते हुए सभी विवि से इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने को कहा है। वैश्विक महामारी कोरोना का शिक्षा पर भी व्यापक असर पड़ा है। डेढ़ महीने से अधिक समय से कॉलेज-कैंपस बंद हैं। परीक्षा और नया सत्र भी देरी से शुरू होने की संभावना बढ़ गई हैं। यही कारण है कि यूजीसी ने कोरोना के कारण छात्रों की परीक्षा और शैक्षणिक गतिविधियों से संबंधित शिकायतों के निवारण को अलग से शिकायत निवारण प्रकोष्ठ का गठन करने के निर्देश दिए हैं। यूजीसी के सचिव प्रो. रजनीश जैन की ओर से जारी पत्र में सभी विवि से छात्रों की शिकायतों के निस्तारण के लिए अलग से शिकायत निवारण प्रकोष्ठ का गठन करने के निर्देश दिए गए।

दून विश्वविद्यालय में कोरोना संकट के चलते अखिल भारतीय स्तर पर आयोजित होने वाली प्रवेश परीक्षा इस बार नहीं होगी। अब विवि में यूजी और पीजी कक्षाओं में दाखिले मेरिट के आधार होंगे।विवि के कुलसचिव डॉ. एमएस मंद्रवाल ने बताया कि विवि के कुलपति डॉ. एके कर्नाटक की अध्यक्षता में हुई शैक्षणिक परिषद की बैठक में नए सत्र में दाखिले और परीक्षा को लेकर अहम निर्णय लिए गए। बताया कि विवि में इस बार मिड सेमेस्टर परीक्षा नहीं होंगी। इसके स्थान पर सीधे फाइनल सेमेस्टर की परीक्षा होंगी। 100 अंकों की यह परीक्षा जुलाई में आयोजित होगी। *30 अगस्त तक परीक्षा परिणाम जारी कर दिए जाएंगे। इसके बाद एक सितंबर से नए सत्र के लिए दाखिले शुरू होंगे। यूजी और इंटिग्रेटेड पीजी के कोर्सेज में 12वीं के अंकों और पीजी कोर्सेज में ग्रेजुएशन के अंकों की मेरिट के आधार पर दाखिले होंगे।

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