केदारनाथ में प्रभावितों को मिलेगा भूमिधरी अधिकार, सरकार ने लिया ये फैसला

केदारनाथ धाम में अधिगृहीत निजी नाप भूमि के बदले दी गई भूमि का भूमिधरी अधिकार प्रभावित व्यक्तियों को मिलेगा। राज्य मंत्रिमंडल ने गुरुवार को इस संबंध में उत्तर प्रदेश (उत्तराखंड) जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम के तहत ये प्रविधान किए जाने का निर्णय लिया।

श्री केदारनाथ धाम में वर्ष 2013 में दैवीय आपदा की वजह से केदारपुरी मंदिर क्षेत्र स्थित भवन, लॉज, तीर्थ पुरोहितों के भवन क्षतिग्रस्त हो गए थे। इसके बाद केदारपुरी के पुनर्निर्माण के लिए प्रभावित परिवारों की निजी नाप भूमि और भवनों को अनुबंध के आधार पर अधिगृहीत किया गया। केदारपुरी मंदिर के नीचे वैली ब्रिज तक 30 फीट चौड़े पैदल मार्ग और केदारनाथ मंदिर प्लेटफार्म के दायीं व बायीं ओर 30-30 फीट की परिधि में आने वाली निजी नाप भूमि ली गई। इसके बदले प्रभावित व्यक्तियों को उनके स्वामित्व के बराबर भूमि सरकार दे रही है।

इस भूमि का भूमिधरी अधिकार देने की व्यवस्था वर्ष 2015 के शासनादेश में कही गई है। इस व्यवस्था आपदा विभाग का शासनादेश आड़े आ गया। इस शासनादेश के मुताबिक पुनर्वास प्रक्रिया में क्षतिग्रस्त संपत्ति पर विधिक स्वामित्व होने पर जमींदारी विनाश (जेडए) भूमि पर विधिक स्वामित्व अधिकार दिया जा सकता है, लेकिन गैर जमींदारी विनाश (नॉन जेडए) की भूमि पर यह अधिकार नहीं होगा। यह भूमि पट्टे पर दी जाएगी।
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श्री केदारपुरी क्षेत्र में जेडए के भूमि की उपलब्धता न होने के कारण कुछ प्रभावित परिवारों को नॉन जेडए की भूमि उपलब्ध कराई गई है। भविष्य में भी शेष परिवारों को भी पुनर्वास के लिए भूमि दी जानी है। नॉन जेडए भूमि पर भूमिधरी अधिकार देने का प्रविधान नहीं होने से पेश आई समस्या का मंत्रिमंडल ने समाधान किया। तय किया गया है कि नॉन जेडए की भूमि को उत्तर प्रदेश (उत्तराखंड) जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950 का प्रसार किया जाएगा। ये अधिनियम की धारा-दो की उपधारा-चार में राज्य सरकार को ऐसे क्षेत्र में प्रसार करने का अधिकार प्राप्त है।

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