उत्तराखंड युथ फाउंडेसन के जनक अजय कोठियाल का जन्म दिवस आज,सम्पूर्ण प्रदेश वासियों ने दी हार्दिक शुभकामनाएं

उत्तराखंड के गौरव देश की शान युथ फाउंडेसन के जनक केदार नाथ आपदा मे मसीहा बनकर आगे आकर हजारों सैलानियों की जान बचाने वाले ओर अपने अथक प्रयासों से अभी तक पहाड के लगभग 12 हजार युवाओं को युथ फाउंडेसन कैंप मे प्रशिक्षण प्रदान कर सेना मे भर्ती करा चुके
असहायों की मदद मे सदैव समर्पित देश के महान पर्वतारोही एवरैष्ट विजेता जिनका नाम सुनते ही दुश्मन थर थर कांप जाता था देश की सरहदों पर दुश्मनों को नेस्तनाबुद कर छक्के छुडाने वाले जिनके सीने पर सुशोभित कीर्ति चक्र शौर्य चक्र व विशिष्ट सेवा पदक व
राष्ट्रपति सहित सेनाध्यक्ष व सेना के उच्चाधिकारियों द्वारा कई बार प्रशस्ति पत्रों से अलंकृत होना जिनके साहस बीरता व कुशल नेतृत्व का परिचय देती है यैसे महान योद्धा हिमालय पूत्र कर्नल को आज पूरे उत्तराखंड वासियों ने उनके 51 वे जन्म दिवस पर हार्दिक बधाइयाँ दी

सेना के लिए तैयार हो रहे युवा

जिसने पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं को नशा एवं बेरोजगारी के भंवर से बाहर निकालकर उन्हें अनुशासन का पाठ पढ़ाया। शारीरिक एवं मानसिक रूप से दक्ष यही युवा आज देश की सीमाओं के प्रहरी बन गए हैं। इसका श्रेय जाता है उत्तरकाशी स्थित नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) के प्रधानाचार्य कर्नल अजय कोठियाल को, जिन्होंने यूथ फाउंडेशन ट्रस्ट की नींव रखी। चार साल से यह ट्रस्ट युवाओं को न सिर्फ सैन्य प्रशिक्षण दे रहा है, बल्कि सामाजिक सरोकारों में भी भागीदारी कर रहा है। 

युथ फाउंडेसन

मूलरूप से टिहरी जिले के निवासी कर्नल अजय कोठियाल का बचपन फौजी माहौल में बीता। सेना में कार्यरत पिता सत्यशरण कोठियाल को देखते हुए बड़े हुए अजय भी सेना में आकर देशसेवा में लग गए। 

उन्होंने अपने पराक्रम का लोहा मनवाते हुए कई सैन्य अभियानों में दुश्मनों के दांत खट्टे किए। इस बहादुरी के लिए उन्हें कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र व विशिष्ट सेवा मेडल से नवाजा जा चुका है।

कर्नल कोठियाल बताते हैं कि अप्रैल 2013 में उनका ट्रांसफर बतौर प्रधानाचार्य निम में हुआ। उनके यहां आने पर गांव वाले उनसे अपने बच्चों को भी फौज में ले जाने की सिफारिश करने लगे। उन्होंने सोचा कि क्यों न युवाओं को सैन्य प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि वे अपनी क्षमताओं के बूते आगे बढ़ें। 

उन्होंने निम में आसपास के क्षेत्रों के कुछ युवाओं को प्रशिक्षण देना शुरू किया। लेकिन, कुछ समय बाद ही प्रदेश में आपदा आ गई और वह अपनी टीम के साथ राहत एवं बचाव कार्य में लग गए। वहां उन्हें कुछ ऐसे युवा दिखे, जिन्होंने इस कार्य में काफी सहयोग किया। कद-काठी से मजबूत इन युवाओं के पास कोई रोजगार नहीं था। सो, उन्होंने इन युवाओं को ट्रेनिंग देने का निश्चय किया। कुछ ही समय बाद हुई भर्ती रैली में इनमें से अधिकांश सेना में भर्ती हो गए। 

इससे उत्साहित कर्नल कोठियाल ने मुहिम को आगे बढ़ाते हुए यूथ फाउंडेशन ट्रस्ट की नींव रखी। फाउंडेशन ने पर्वतीय जिलों के दूरस्थ क्षेत्रों में मुहिम चलाकर ऐसे युवाओं को खोजा, जो पढ़े-लिखे तो थे, मगर बेरोजगारी के कारण दुष्प्रवृत्तियों में पड़ गए। 

उन्हें फाउंडेशन के प्रशिक्षण कैंप में सैन्य अनुशासन सिखाया गया। आज प्रदेश के छह जिलों में समय-समय पर ऐसे प्रशिक्षण कैंप यूथ फाउंडेशन के माध्यम से आयोजित हो रहे हैं। युवाओं का पूरा खर्चा फाउंडेशन ही वहन करता है। 

कर्नल कोठियाल के मुताबिक कैंप में युवाओं को सैन्य ट्रेनिंग पारंपरिक तरीकों से दी जाती है। उन्हें लिखित परीक्षा की भी तैयारी कराई जाती है। 

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