देश के वनों के कार्बन को ग्रहण करने की क्षमता में हुआ इजाफा

ग्लोबल वार्मिंग (वैश्विक ताप) और क्लाइमेट चेंज (जलवायु परिवर्तन) के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए वातावरण में घुल रहे कार्बन के उत्सर्जन में कमी लाना जरूरी है। इस काम में पेड़-पौधे अहम भूमिका निभाते हैं, जो भोजन बनाते समय प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में कार्बन डाई ऑक्साइड ग्रहण करते हैं और प्राणदायक ऑक्सीजन छोड़ते हैं। अच्छी बात है कि देश के वनों के कार्बन को ग्रहण (स्टॉक) करने की क्षमता में दो साल की अवधि में 42.6 मिलियन टन (4.26 करोड़ टन) का इजाफा हुआ है। इसके साथ ही देश के वनों का कुल कार्बन स्टॉक भी बढ़कर 7.12 मिलियन टन को पार कर गया है।

पत्रकारों से रूबरू भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआइ) के महानिदेशक डॉ. सुभाष आशुतोष ने बताया कि सर्वाधिक कार्बन स्टॉक मिट्टी में दफ्न है। इसी बायोमास के कार्बन स्टॉक में सर्वाधिक बढ़ोत्तरी भी दर्ज की गई है। इसी तरह सबसे कम कार्बन बैंक या स्टॉक मृत पड़ी लकडिय़ों में पाया गया। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह भी रही कि वनों में बिखरी पड़ी पत्तियों, खास-फूस आदि में वर्ष 2017 व 2019 की रिपोर्ट के बीच 8.3 मिलियन टन की कमी पाई गई। शेष सभी स्तर पर कार्बन का स्टॉक बढ़ा है।

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