परिवार, बिजनेस या राजनीति सभी के लिए मनुष्य की सबसे बड़ी शत्रु है ये

आचार्य चाणक्य के अनुसार मनुष्य की भूख को उसका सबसे बड़ा शत्रु बताया है। आचार्य चाणक्य का कहना है कि मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन कोई और नहीं बल्कि उसकी भूख ही है। यहां पर भूख का मतलब आप सत्ता, बिजनेस, मकान या फिर पैसा किसी से भी जोड़कर देख सकते हैं। इन सभी की अति मनुष्य के विनाश का कारण बनती है।

असल जिंदगी में आपने कई बार देखा होगा कि कुछ लोग पैसों के पीछे इतने भागते हैं कि उनका परिवार ही दांव पर लग जाता है। यहां तक कि उनके रिश्ते भी पैसों की भेंट चढ़ जाते हैं। फिर भी उस व्यक्ति को तसल्ली नहीं होती और वो तब तक उसके पीछे भागता रहता है जब तक उसके पास कुछ भी न बचें। ऐसा व्यक्ति पैसों की लालच में इस तरह गिरफ्त होता है कि उसे समझाने का भी कोई फायदा नहीं होता।

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