
मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल के डॉ. अभिजीत पवार बताते हैं, कि “गर्दन के ठीक नीचे और पीठ के ठीक ऊपर गोले जैसा उभार का मुख्य कारण बैठने के तरीके का ग़लत होना है, लंबे समय तक आगे की ओर झुककर बैठना, झुककर फ़ोन देखना, सिर नीचे करके फ़ोन इस्तेमाल करना और लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम करना भी इस झुकाव का कारण बन सकता है। ”
डॉ. पवार के मुताबिक़, “ग़लत तरीके से बैठने के बाद इसका दूसरा प्रमुख कारण ऑस्टियोपोरोसिस है। इसमें हड्डियों के कमज़ोर होने से रीढ़ की हड्डी में चोट लगती है और उसका टेढ़ापन असामान्य रूप से बढ़ जाता है. मोटापा भी रीढ़ की हड्डी पर तनाव बढ़ाता है। साथ ही, कुछ मेडिकल कारणों से भी काइफोसिस हो सकता है। ”
हम सभी की रीढ़ की हड्डी में किसी न किसी तरह का टेढ़ापन होता है, लेकिन अगर यह टेढ़ापन 45 डिग्री से ज़्यादा हो, तो यह परेशानी का सबब बन जाता है और इलाज की ज़रूरत पड़ती है। कभी-कभी पीठ में उभार के अलावा कोई अन्य लक्षण दिखाई नहीं देते। हालाँकि, कई मरीज़ों को पीठ दर्द, पीठ की मांसपेशियों में जकड़न, रीढ़ के पास दर्द और थकान जैसे लक्षण महसूस होते हैं।
काइफोसिस एक प्रकार का कुबड़ापन है, जो गर्दन के नीचे कई कारणों से विकसित हो सकता है , इसका मुख्य कारण ग़लत तरीके से बैठना है. कई लोग कुर्सी पर झुककर या कंधे झुकाकर बैठते हैं, जिससे यह समस्या अक्सर होती है।
कंधे पर भारी बैग उठाने से पीठ और कंधों की मांसपेशियों में दर्द हो सकता है। इससे रीढ़ की हड्डी टेढ़ी हो सकती है, कभी-कभी रीढ़ की हड्डी के ठीक से विकास न होने के कारण भी यह स्थिति बनती है. गर्भावस्था के दौरान शिशु के रहते हुए रीढ़ की हड्डी का विकास ठीक से न हो पाए, या कुछ मामलों में दो या अधिक कशेरुकाएँ आपस में जुड़ जाएँ, तो भी यह समस्या हो सकती है।
नवी मुंबई स्थित अपोलो हॉस्पिटल्स के कंसल्टेंट स्पाइन सर्जन डॉ. अग्निवेश टिक्कू ने बताया, “गर्दन के कूबड़ को बफ़ैलो हंप भी कहा जाता है. यह समस्या मुख्य रूप से लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों को होती है. जो लोग लंबे समय तक बैठे रहते हैं, कंप्यूटर पर देर तक काम करते हैं और मोबाइल फ़ोन का बहुत अधिक इस्तेमाल करते हैं, उन्हें भी यह समस्या हो सकती है.”
“लगातार आगे की ओर झुककर मोबाइल फ़ोन और कंप्यूटर चलाना, इस्तेमाल के दौरान सिर आगे करना और गर्दन झुकाना—इन आदतों से गर्दन के पास की मांसपेशियों में असंतुलन पैदा होता है और गर्दन के अंत में चर्बी जमा हो जाती है.”
डॉ. टिक्कू के अनुसार, “पीसीओएस, लंबे समय तक स्टेरॉयड का इस्तेमाल, मोटापा और आनुवंशिक विकारों से जूझ रही महिलाओं में यह समस्या अधिक देखी जाती है.”
कुछ लोगों में मांसपेशियों की कमज़ोरी भी इस समस्या का कारण बनती है. इसके अलावा, एंकिलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस के मरीज़ों को भी यह परेशानी हो सकती है.