
भारत के रूस में राजदूत विनय कुमार का कहना है कि “भारत और रूस के पास राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार निपटान की एक व्यवस्था है. अभी तेल आयात के भुगतान में कोई दिक़्क़त नहीं है.”
भारतीय निर्यात संगठन महासंघ (एफ़आईईओ) के महानिदेशक और सीईओ अजय साहा ने इससे पहले तास को बताया था कि भारतीय बैंकों में रूसी निर्यातकों के अरबों रुपये पड़े हैं. हालाँकि, उन्होंने सटीक राशि नहीं बताई.
उन्होंने यह भी कहा था कि भारतीय रुपये में रूस के साथ व्यापार अब भी जारी है, “हमने साफ़ कहा है कि हमारा उद्देश्य भारत के 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा है. रूस समेत कई अन्य देशों के साथ भारत का सहयोग वैश्विक तेल बाज़ार में स्थिरता लाने में मददगार रहा है. रूस के साथ व्यापार करने वाले अन्य देश भी हैं, जिनमें ख़ुद अमेरिका और यूरोप शामिल हैं.”
अमेरिका के फ़ैसले को “अनुचित, अव्यावहारिक और ग़ैर-ज़रूरी” बताते हुए कुमार ने कहा कि भारत सरकार “ऐसे क़दम उठाती रहेगी जो देश के राष्ट्रीय हित की रक्षा करें.”
शनिवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, “यह अजीब है कि एक प्रो-बिज़नेस अमेरिकी प्रशासन के लोग दूसरों पर बिज़नेस करने का आरोप लगा रहे हैं.”
अमेरिका में रिपब्लिकन नेता निकी हेली ने मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई है और कहा है कि अमेरिका को समझना चाहिए कि चीन का सामना करने के लिए उसे भारत जैसे मित्र की ज़रूरत है.
अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा कि ट्रंप अपनी नीतियों से अपने सहयोगियों को दूर कर रहे हैं. वहीं अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी भारत पर लगाए टैरिफ़ का विरोध करते दिखे हैं.
20 अगस्त को निकी हेली ने अमेरिकी मैगज़ीन ‘न्यूज़वीक‘ में लिखा, “भारत को रूस से तेल ख़रीदने पर ट्रंप की आपत्ति को गंभीरता से लेना चाहिए और व्हाइट हाउस के साथ मिलकर इसका हल निकालना चाहिए. जितनी जल्दी हो, उतना अच्छा है. चीन का सामना करने के लिए अमेरिका को भारत जैसे दोस्त की ज़रूरत है.”
जॉन केरी ने नई दिल्ली में ईटी वर्ल्ड लीडर्स फ़ोरम में कहा, “हम चिंतित हैं. राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी के बीच जो तनाव है वो दुर्भाग्यपूर्ण है.”
“मुझे लगता है कि एक महान देश को अपनी महानता जताने के लिए हमेशा लोगों को धमकियां देना ज़रूरी नहीं है. ट्रंप प्रशासन ने कूटनीति के ज़रिए हल ढूंढने की बजाय आदेश और दबाव डालने का तरीक़ा अपनाया”