हरदा ने कहा कि बोर्ड के पीछे आय नहीं बल्कि चारधाम यात्रा को सुगम और सुचारु बनाने की सोच होनी चाहिए। यात्रियों व स्थानीय लोगों का का हित सर्वोपरि माना जाएं। केवल जिद से सरकारें नहीं चलती हैं। सरकार को अगर अपने प्रयोग के नतीजे बहुत लाभकारी नहीं दिखाई दे रहे हैं तो फिर अपने ही राज्य की जनता के एक हिस्से के ऊपर अपने विचार व निर्णय को थोपना, राज्य सरकार के लिए उचित नहीं है। हरदा ने कहा कि पहले से ही मंदिर कमेटियां बनी हुई हैं। जरूरत उनके फंक्शनिंग को और सुधारने की है। आय जुटाने के लिए कुछ और तरीके निकाले जाए। उन्हें मंदिर कमेटी और पुरोहितगणों की संस्था के साथ मिलकर के क्रियान्वित करें।