वाशिंगटन/इस्लामाबाद/बीजिंग। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट “2025 पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना से संबंधित सैन्य और सुरक्षा घटनाक्रम” में चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य तथा अंतरिक्ष संबंधों का विस्तृत खुलासा किया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन पाकिस्तान में संभावित सैन्य अड्डा स्थापित करने पर विचार कर रहा है और दोनों देशों के बीच रक्षा, वायु शक्ति और अंतरिक्ष सहयोग गहरा रहा है।
1. पाकिस्तान में सैन्य अड्डा स्थापित करने पर विचार
पेंटागन रिपोर्ट के अनुसार:
चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) अतिरिक्त सैन्य सुविधाएं स्थापित करने के लिए सक्रिय रूप से विचार कर रही है।
पाकिस्तान ऐसे देशों में से एक है जहाँ चीन ने संभावित सैन्य अड्डा स्थापित करने पर विचार किया है।
रिपोर्ट की भाषा में कहा गया है कि यह निर्णय चीन की वैश्विक सैन्य उपस्थिति बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि चीन ने अंगोला, बांग्लादेश, म्यांमार, क्यूबा, इंडोनेशिया, केन्या, नाइजीरिया, श्रीलंका, UAE सहित कई अफ़्रीकी, एशियाई और समूह देशों में सैन्य सुविधाएँ स्थापित करने पर विचार किया है।
2. रक्षा सहयोग: विमान, ड्रोन एवं सुसज्जन की आपूर्ति
रिपोर्ट में चीन-पाकिस्तान रक्षा सहयोग के प्रमुख बिंदु हैं:
- ✈️ लड़ाकू विमानों की आपूर्ति
- चीन ने पाकिस्तान को 20 जे-10C लड़ाकू विमान आपूर्ति कर दिए हैं (मई 2025 तक)।
- इसके अलावा चीन तीन प्रकार के लड़ाकू विमान निर्यात के लिए पेश कर रहा है:
- FC-31 (पांचवीं पीढ़ी)
- J-10C (चौथी पीढ़ी मल्टीरोल)
- JF-17 (चीन-पाक संयुक्त निर्माण हल्का लड़ाकू विमान)
यह सैन्य उन्नयन पाकिस्तान की वायु शक्ति को महत्वपूर्ण ताकत देता है और दोनों देशों के बीच सामरिक संबंधों को और मजबूत करता है।
2. 🤖 ड्रोन और उन्नत उपकरण
रिपोर्ट में उल्लेख है कि चीन ने कई देशों को काइहोंग और विंग लूंग ड्रोन की आपूर्ति भी की है, जिनमें शामिल हैं:
– अल्जीरिया, मिस्र, इथियोपिया, इराक, मोरक्को, म्यांमार, पाकिस्तान, सर्बिया और यूएई।
ड्रोन जैसे उन्नत उपकरण दोनों देशों की रणनीतिक और सीमा निगरानी क्षमता को बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं।
3. समुद्री रणनीति और वैश्विक पहुंच
पेंटागन रिपोर्ट में कहा गया है कि:
- PLA मलक्का जलडमरूमध्य, हॉर्मूज़ जलडमरूमध्य और अफ़्रीका तथा मध्य एशिया के समुद्री मार्गों तक पहुंच बनाने में रुचि रखती है।
- यह चीन की वैश्विक सैन्य और सुरक्षा प्रक्षेपण शक्ति को और विस्तारित करने की रणनीति का हिस्सा है।
इन रणनीतिक समुद्री मार्गों पर प्रभाव स्थापित करना चीन की वैश्विक शक्ति संतुलन में भूमिका को संशोधित कर रहा है, जिससे अमेरिकी एवं अन्य पश्चिमी देशों के साथ प्रतिस्पर्धा की संभावना बढ़ती है।
4. अंतरिक्ष सहयोग: लूनर और वैश्विक गतिविधियाँ
रिपोर्ट में अंतरिक्ष सहयोग को भी प्रमुख रूप से उठाया गया है:
2024 में चीन ने अपनी अंतरिक्ष सहयोग गतिविधियाँ तेज कर दीं।
पाकिस्तान सहित कई देशों ने चीन के अंतरराष्ट्रीय लूनर रिसर्च स्टेशन (ILRS) में सहयोग समझौते किए हैं।
पेंटागन का विश्लेषण है कि चीन यह प्रयास अधिक देशों को अपने अंतरिक्ष नेटवर्क से जोड़ने और वैश्विक नेतृत्व के लिए अमेरिकी प्रभाव को चुनौती देने के लिए कर रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि पेंटागन रिपोर्ट से निम्न महत्वपूर्ण निष्कर्ष उभरते हैं:
✔️ चीन-पाक रणनीतिक समझौता अब सिर्फ निवेश या विज्ञान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रक्षा संरचना, विमान आपूर्ति, ड्रोन तकनीक और साझेदारी तक विस्तारित हो गया है।
✔️ पीएलए की संभावित विदेशी अड्डों की सूची यह संकेत देती है कि चीन अब वैश्विक स्तर पर सैन्य पहुंच की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
✔️ अंतरिक्ष में सहयोग समझौते चीन को सहयोगी अंतरिक्ष शक्ति के रूप में मान्यता दिलाने का प्रयास दिखाते हैं, जो अमेरिकी नेतृत्व और सुरक्षा तंत्र के सामने चुनौती खड़ी कर सकते हैं।
पेंटागन की रिपोर्ट चीन और पाकिस्तान के बीच रक्षा और अंतरिक्ष के क्षेत्रों में गहरा सहयोग दिखाती है — जिसमें संभावित सैन्य अड्डों की स्थापना, लड़ाकू विमान आपूर्ति, ड्रोन तकनीक और अंतरिक्ष साझेदारी शामिल हैं। यह सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा, सामरिक संतुलन और वैश्विक शक्ति संरचना के लिए महत्वपूर्ण geopolitical संकेत देता है।

