उत्तराखंड: गैरसैंण के सीमावर्ती मेहलचौरी और कुनीगाड क्षेत्रों में पिछले एक महीने से लगातार मवेशियों पर गुलदार के हमलों से ग्रामीणों में दहशत फैल गई है। बृहस्पतिवार रात्रि को गुलदार ने उजेटिया गांव के राजेंद्र मेहरा की गौशाला में घुसकर गाय और उसके बछड़े को अपना निवाला बनाया।
इसके अलावा, गढ़वाल क्षेत्र के भंडारीखोड में कृष्णानंद थपलियाल की तीन गायों को गुलदार ने मार डाला। उजेटिया के मोहन सिंह के पालतू कुत्ते पर दोपहर में हमला कर उसे घायल कर दिया गया, वहीं रंगचौणा की लीला देवी की गाय को भी गौशाला में मारा गया।
अल्मोड़ा जनपद के पसारागांव, पुरानालोहबा और नवाण में भी गुलदार ने पांच गायों को अपना निवाला बनाया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ऐसी घटनाएं जारी रहीं, तो गुलदार बच्चों और वृद्धों पर भी हमला कर सकता है।
उजेटिया में हुए हमले के बाद ग्रामीणों ने दो घंटे तक वनकर्मियों को बंधक बनाए रखा। बाद में मौके पर पहुंचे जिपंस सुरेश बिष्ट ने तत्काल पिंजरा लगाने का आश्वासन दिया। इसके बाद वनकर्मियों को मुक्त किया गया और मृत गायों को पोस्टमार्टम के बाद दफनाया गया।
सुरेश बिष्ट ने कहा कि गुलदार के बढ़ते हमलों की गंभीरता को देखते हुए इसकी नरभक्षी होने की संभावना है। इसके लिए उन्होंने डीएफओ से वार्ता की और अब क्षेत्र में पिंजरे लगाने की अनुमति दे दी गई है।
सिलंगा ग्राम की प्रधान दीपा देवी और क्षेत्रीय प्रतिनिधि वीरेंद्र नेगी ने कहा कि जिस प्रकार अल्मोड़ा में दो दिन में गुलदार को पकड़ लिया गया था, उसी तरह उनके क्षेत्र से भी इसे दूर किया जाना चाहिए।
वनक्षेत्राधिकारी प्रदीप गौड़ ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र में पिंजरा लगा दिया गया है और वनकर्मियों की गस्त बढ़ा दी गई है। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
