तेहरान, ईरान: नए साल के पहले दिन ईरान में सरकार विरोधी विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप ले गए। राजधानी तेहरान के साथ-साथ इस्फ़हान, यज़्द, कोहदस्त, ज़ंजन और फ़ासा जैसे शहरों में भी लाखों लोग सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों और सरकारी सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में कई लोगों की मौत की खबरें सामने आ रही हैं।
ईरान में लगातार बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और अर्थव्यवस्था की खस्ता हालत ने जनता को सड़कों पर ला दिया है। देश में महंगाई दर 50 प्रतिशत है और कई शहरों में पानी की भी किल्लत बनी हुई है, जिससे बिजली और जीवन यापन पर भी असर पड़ा है।
विरोध प्रदर्शन की शुरुआत चार दिन पहले राजधानी तेहरान में हुई थी, जब व्यापारियों ने खराब आर्थिक हालात के खिलाफ मार्च निकाला। इसके बाद तेहरान यूनिवर्सिटी के छात्र भी शामिल हो गए और प्रदर्शन धीरे-धीरे देश के अन्य शहरों में फैल गया।
फ़ासा शहर में प्रदर्शनकारियों ने गवर्नर कार्यालय पर हमला किया, जिससे नुकसान हुआ। सुरक्षा बलों ने भीड़ को रोकने के लिए फायरिंग की, जिसमें कई लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। कोहदस्त शहर में भीड़ ने पुलिस पर हमला किया, जिसमें एक पुलिसकर्मी की मौत और दस से ज्यादा घायल हुए।
ईरान की आर्थिक समस्याओं की जड़ अमेरिका और यूरोपीय देशों के प्रतिबंध माने जा रहे हैं। 2018 में पुनः लगाए गए ये प्रतिबंध देश की मुद्रा रियाल को प्रभावित कर चुके हैं। एक साल पहले जो डॉलर 8 लाख रियाल में मिलता था, अब उसकी कीमत लगभग 15 लाख रियाल हो गई है। जून 2025 में इज़राइल के साथ युद्ध और अमेरिकी बमबारी ने स्थिति और खराब कर दी।
ईरान की सरकार ने कहा कि वह जनता की समस्याओं को सुन रही है और समाधान के प्रयास कर रही है। राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियां ने कहा कि देश की मौजूदा आर्थिक हालत उनके नियंत्रण से बाहर है और विरोध प्रदर्शन विदेशी ताकतों की साजिश का हिस्सा हैं। उन्होंने जनता से देश की एकता बनाए रखने का आह्वान किया और कहा कि ईरान इस समय full scale war का सामना कर रहा है।
