प्योंगयांग/सियोल। उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। उत्तर कोरिया ने आरोप लगाया है कि दक्षिण कोरिया ने उसके हवाई क्षेत्र में जासूसी के उद्देश्य से ड्रोन भेजा, जिसे उसकी सेना ने मार गिराया। प्योंगयांग ने इस कथित घुसपैठ को गंभीर उकसावा बताते हुए सियोल को कड़े परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।
कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) के अनुसार, जनवरी की शुरुआत में उत्तर कोरियाई सेना ने साउथ कोरिया की सीमावर्ती गैंगवा काउंटी से उड़ान भरते एक ड्रोन को ट्रैक किया, जो उत्तर कोरिया के केसोंग शहर के पास गिराया गया। उत्तर कोरिया का दावा है कि ड्रोन पर अत्याधुनिक निगरानी उपकरण लगे थे और उसमें उसके महत्वपूर्ण सैन्य व सीमावर्ती ठिकानों की फुटेज मौजूद थी।
उत्तर कोरिया के सैन्य प्रवक्ता ने इसे सितंबर में हुई पिछली घटनाओं से जोड़ते हुए कहा कि अगर इस तरह की गतिविधियां दोहराई गईं तो दक्षिण कोरिया को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
दूसरी ओर, दक्षिण कोरिया ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि उसके पास ऐसी किसी उड़ान का कोई रिकॉर्ड नहीं है। रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक ने स्पष्ट किया कि जिस ड्रोन का उल्लेख किया जा रहा है, वह दक्षिण कोरियाई सेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले किसी मॉडल से मेल नहीं खाता। साउथ कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
इस घटना से पहले भी 2024 के अंत में उत्तर कोरिया ने अपने ऊपर ड्रोन उड़ाने के आरोप लगाए थे, जिनकी सियोल जांच कर रहा है। हालांकि दक्षिण कोरियाई सेना ने अब तक ऐसी किसी उड़ान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
दोनों देशों के बीच बढ़ते आरोप-प्रत्यारोप ने कोरियाई प्रायद्वीप में एक बार फिर तनावपूर्ण हालात पैदा कर दिए हैं।
