आमतौर पर बासी भोजन को सेहत के लिए नुकसानदेह माना जाता है, लेकिन 12–15 घंटे पुरानी गेहूं की रोटी के मामले में यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। आयुर्वेद और पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, सही तरीके से रखी गई बासी रोटी कई बीमारियों में ताजी रोटी से भी अधिक लाभकारी हो सकती है।
आइए जानते हैं कि किन लोगों के लिए बासी रोटी किसी औषधि से कम नहीं है –
बासी रोटी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) ताजी रोटी की तुलना में कम हो जाता है। इसमें Resistant Starch बढ़ जाता है, जिससे ब्लड शुगर तेजी से नहीं बढ़ती।
👉 सुबह खाली पेट बासी रोटी को फीके ठंडे दूध में भिगोकर खाना डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है।
बासी रोटी में सोडियम कम और फाइबर ज्यादा होता है। ठंडे दूध के साथ सेवन करने पर यह शरीर के तापमान को संतुलित करता है और
ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखने में मदद करता है।
अगर आपको अक्सर गैस, एसिडिटी, कब्ज जैसी समस्याएं रहती हैं, तो बासी रोटी आपके लिए रामबाण हो सकती है। इसमें मौजूद फाइबर और प्रोबायोटिक गुण पेट को साफ रखते हैं और आंतों को मजबूत बनाते हैं।
बासी रोटी में कैलोरी थोड़ी कम फाइबर ज्यादा हो जाता है, जिससे यह देर तक पेट भरा रखती है और बार-बार भूख लगने से बचाती है।
👉 जो लोग वजन कम करना चाहते हैं, उनके लिए बासी रोटी एक बेहतरीन विकल्प है।
ध्यान रखने योग्य बातें
- रोटी साफ कपड़े में ढकी हुई और सामान्य तापमान पर रखी हो।
- फंगस लगी, बदबूदार या बहुत ज्यादा पुरानी रोटी का सेवन न करें।
- 12 से 15 घंटे से ज्यादा पुरानी रोटी न खाएं।
सही तरीके से रखी गई बासी गेहूं की रोटी
डायबिटीज, हाई बीपी, पाचन समस्या और मोटापे से जूझ रहे लोगों के लिए किसी नेचुरल दवा से कम नहीं है।
