श्रीहरिकोटा। नए साल 2026 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को एक झटका लगा है। इसरो का बहुप्रतीक्षित PSLV-C62 मिशन, जिसके तहत पृथ्वी अवलोकन उपग्रह EOS-N1 (अन्वेषा) को अंतरिक्ष में स्थापित किया जाना था, तकनीकी खामी के चलते असफल हो गया। यह लॉन्च सोमवार सुबह करीब 10:17 बजे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के प्रथम प्रक्षेपण स्थल से किया गया था।
इसरो के अनुसार, लॉन्च से पहले सभी पैरामीटर्स सामान्य थे और ऑटोमैटिक सिक्वेंस भी सफलतापूर्वक पूरा किया गया। रॉकेट ने तय समय पर उड़ान भरी, लेकिन थर्ड स्टेज के अंतिम चरण में तकनीकी खराबी आ गई, जिसके कारण EOS-N1 और उसके साथ भेजे जा रहे 14 सह-यात्री पेलोड्स को निर्धारित कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका।
इसरो के लिए यह मिशन बेहद अहम था, क्योंकि यह साल 2026 का पहला प्रक्षेपण था। इस मिशन के तहत EOS-N1 (अन्वेषा) – DRDO द्वारा विकसित हाइपरस्पेक्ट्रल अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट इसके साथ 14 अन्य घरेलू और विदेशी पेलोड्स को भी अंतरिक्ष में स्थापित किया जाना था।
यह मिशन इसरो की वाणिज्यिक शाखा न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के माध्यम से संचालित किया गया था।
EOS-N1 को खासतौर पर सीमा निगरानी, छिपे लक्ष्यों की पहचान, पर्यावरण और आपदा प्रबंधन की निगरानी के लिए तैयार किया गया था। इसके सफल होने से रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में भारत की क्षमता कई गुना बढ़ने की उम्मीद थी।
मिशन असफल होने के बाद इसरो ने कहा है कि थर्ड स्टेज में आई तकनीकी खामी की विस्तृत जांच की जाएगी। इसके आधार पर आगे के प्रक्षेपणों के लिए जरूरी सुधार किए जाएंगे।
PSLV-C62 को 2025 की पिछली असफलता के बाद इसरो के मजबूत कमबैक के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन तकनीकी बाधा के चलते यह मिशन अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पाया।
