भारत की संसद ने Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India (SHANTI) Bill, 2025 पास कर दिया है। यह बिल देश के सिविल न्यूक्लियर सेक्टर में निजी और विदेशी निवेश को आकर्षित करने और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने का लक्ष्य रखता है। पारदर्शिता और सुरक्षा मानकों को बनाए रखते हुए यह कानून पहले के Atomic Energy Act और Civil Liability for Nuclear Damage Act को संशोधित करता है।
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को इस बिल के पारित होने पर बधाई दी है और कहा है कि इस नए कानून से अमेरिका-भारत के बीच असैन्य परमाणु सहयोग (Civil Nuclear Cooperation) को और मजबूत करने के अवसर पैदा होंगे। रूबियो ने अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत के न्यूक्लियर क्षेत्र में अवसरों को विस्तार देना, ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों को आगे बढ़ाना, और महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा पर भी अपनी रुचि जताई है।
दोनों मंत्रियों के बीच टेलीफोन पर विस्तृत बातचीत हुई, जिसमें उन्होंने न केवल न्यूक्लियर सहयोग पर चर्चा की, बल्कि व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में साझेदारी, और एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र की प्रतिबद्धता पर भी बात की। जयशंकर ने इस संवाद को “एक अच्छी बातचीत” बताया है, जिससे दोनों देशों के संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
चूंकि SHANTI बिल भारत की ऊर्जा नीतियों में बदलाव का संकेत देता है और अमेरिका भी इस दिशा में साझेदारी को महत्व दे रहा है, इस संवाद को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और सहयोग को लेकर एक मजबूत संदेश के रूप में देखा जा रहा है। यह कदम चीन के लिए चुनौती या बेचैनी का कारण बन सकता है, क्योंकि क्षेत्रीय रणनीति और शक्ति संतुलन में भारत-अमेरिका के सहयोग की तस्वीर और स्पष्ट होती दिख रही है।
✔ SHANTI बिल 2025 ने भारत में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी और विदेशी निवेश के लिए खोल दिया है, जिससे उद्योग में बड़े निवेश और विशेषज्ञता आने की संभावना है।
✔ अमेरिका इस बिल में गहरी दिलचस्पी दिखा रहा है और दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा व व्यापार सहयोग समेत रणनीतिक बातचीत जारी है।
✔ बातचीत में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता और मुक्त वातावरण पर भी जोर दिया गया, जो क्षेत्रीय राजनीति में नए आयाम जोड़ सकता है
