उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता (यूसीसी) नागरिकों की निजता की सुरक्षा के अपने संकल्प पर पूरी तरह खरी उतरी है। बीते एक साल में यूसीसी के तहत विभिन्न सेवाओं के लिए पांच लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, लेकिन इस दौरान निजता उल्लंघन से जुड़ी एक भी शिकायत सामने नहीं आई है। यह यूसीसी की पारदर्शी और सुरक्षित प्रणाली का बड़ा प्रमाण माना जा रहा है।
राज्य सरकार के अनुसार यूसीसी के तहत लगभग शत प्रतिशत आवेदन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किए जा रहे हैं। इस फेसलेस प्रक्रिया के चलते आवेदकों को किसी सरकारी कार्यालय या अधिकारी के सामने उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं पड़ती। नागरिक घर बैठे ही विवाह पंजीकरण, विवाह विच्छेद, वसीयत पंजीकरण, लिव-इन पंजीकरण और लिव-इन संबंध समाप्त करने जैसी सेवाओं के लिए आवेदन कर रहे हैं।
यूसीसी पोर्टल में नागरिकों की निजी जानकारी को सुरक्षित और गोपनीय रखने के लिए कड़े सुरक्षा प्रावधान किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार एक बार आवेदन सक्षम स्तर से स्वीकृत हो जाने के बाद संबंधित अधिकारी भी आवेदक की निजी जानकारी नहीं देख सकता। आवेदन के साथ साझा की गई निजी जानकारी तक केवल आवेदक की ही पहुंच रहती है, वह भी निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया के तहत।
सरकार का कहना है कि औसतन पांच दिनों में प्रमाणपत्र मिलने से लोगों का समय भी बच रहा है और उन्हें बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। बीते एक साल में यूसीसी के सफल क्रियान्वयन से यह स्पष्ट हो गया है कि नागरिकों की निजता और सुविधा दोनों का पूरा ध्यान रखा गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि शुरुआत में कुछ लोगों ने समान नागरिक संहिता को लेकर नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की थी, लेकिन बीते एक साल के अनुभव ने सभी आशंकाओं को गलत साबित कर दिया है। उन्होंने कहा कि यूसीसी न केवल नागरिकों की निजता का शत प्रतिशत पालन कर रही है, बल्कि यह प्रदेश में सुशासन का एक मजबूत उदाहरण भी बनकर सामने आई है।
