पश्चिमी नाइजर के तिल्लाबेरी क्षेत्र में रविवार को हुए भीषण हमले ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है। गोरोउल गांव में अज्ञात बंदूकधारियों ने ताबड़तोड़ गोलीबारी कर कम से कम 31 ग्रामीणों की हत्या कर दी। इस हमले में चार लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
इस हत्याकांड की जानकारी यूनियन ऑफ नाइजीरियन स्टूडेंट्स से जुड़े संगठनों और स्थानीय निवासियों ने दी। छात्र संगठनों की ओर से जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि रविवार को गोरोउल गांव में कानून को ताक पर रखकर यह नरसंहार किया गया, जिसमें निर्दोष ग्रामीणों को निशाना बनाया गया।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इस हमले को किस संगठन ने अंजाम दिया। न तो किसी आतंकी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी ली है और न ही प्रशासन की ओर से आधिकारिक तौर पर किसी समूह का नाम सामने आया है।
गोरोउल गांव के निवासी हामिदौ अमादौ ने बताया कि हमले में कम से कम 31 लोगों की जान गई है। उन्होंने इस हमले के लिए इस्लामिक स्टेट इन ग्रेटर सहारा (ISGS) से जुड़े आतंकियों को जिम्मेदार ठहराया है। गौरतलब है कि नाइजर में इस्लामिक स्टेट से जुड़े संगठनों समेत कई चरमपंथी गुट सक्रिय हैं, जो आम नागरिकों और सुरक्षा बलों दोनों को निशाना बनाते रहे हैं।
नाइजर में वर्ष 2023 में लोकतांत्रिक सरकार को हटाकर सेना के सत्ता में आने के बाद हालात और ज्यादा बिगड़ते नजर आ रहे हैं। सैन्य सरकार ने सुरक्षा बहाल करने और हिंसा पर नियंत्रण का वादा किया था, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि इसके उलट हमलों की संख्या में इजाफा हुआ है।
गौरतलब है कि पिछले साल सितंबर में भी तिल्लाबेरी इलाके में उग्रवादियों ने घात लगाकर सैनिकों पर हमला किया था, जिसमें 14 जवानों की मौत हो गई थी। उस समय भी हमले में शामिल संगठन का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया था।
पश्चिमी नाइजर में लगातार हो रही हिंसक घटनाएं एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और सैन्य शासन की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रही हैं।
