देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को गढ़ी कैंट स्थित हिमालयन कल्चरल सेंटर में आयोजित प्रथम “समान नागरिक संहिता दिवस” कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने यूसीसी मसौदा तैयार करने वाली समिति के सदस्यों, क्रियान्वयन से जुड़े प्रशासनिक अधिकारियों तथा पंजीकरण कार्य में योगदान देने वाले वीएलसी (Village Level Entrepreneurs) को सम्मानित किया। कार्यक्रम स्थल पर यूसीसी पर आधारित एक फोटो प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसका मुख्यमंत्री ने अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह दिन उत्तराखंड के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगा, क्योंकि इसी दिन राज्य में समान नागरिक संहिता लागू की गई। उन्होंने कहा कि इस कानून के माध्यम से सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत आधार मिला है।
उन्होंने भारतीय परंपरा और समानता के विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 44 में निहित नीति निदेशक सिद्धांतों के अनुरूप यह कदम उठाया गया है।
विधानसभा से राष्ट्रपति की मंजूरी तक का सफर
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि
- 7 फरवरी 2024 को यूसीसी विधेयक राज्य विधानसभा से पारित किया गया
- 11 मार्च 2024 को इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली
- आवश्यक नियमावलियों के बाद 27 जनवरी 2025 को उत्तराखंड में यूसीसी लागू किया गया
उन्होंने कहा कि राज्य में विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों के कारण मौजूद असमानताओं को समाप्त करने की दिशा में यह बड़ा कदम है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, यूसीसी लागू होने से महिलाओं के अधिकारों को मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति से जुड़े मामलों में समान प्रावधान किए गए हैं। साथ ही बच्चों के अधिकारों को लेकर भी स्पष्ट कानूनी व्यवस्था बनाई गई है।
धामी ने बताया कि युवाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण की व्यवस्था की गई है। ऐसे संबंधों से जन्मे बच्चों को जैविक संतान के समान अधिकार दिए जाने का प्रावधान है।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि
- यूसीसी लागू होने से पहले प्रतिदिन औसतन 67 विवाह पंजीकरण होते थे, जो अब 1400 से अधिक हो गए हैं
- राज्य की 30% से अधिक ग्राम पंचायतों में शत-प्रतिशत विवाहित दंपतियों का पंजीकरण पूरा किया जा चुका है
- एक वर्ष में यूसीसी से संबंधित लगभग 5 लाख आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 95% का निस्तारण किया जा चुका है
- 7,500 से अधिक कॉमन सर्विस सेंटरों के माध्यम से ऑनलाइन सेवाएँ दी जा रही हैं
मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में यूसीसी से जुड़े संशोधन विधेयक को राज्यपाल की स्वीकृति मिली है। इसमें विवाह के समय गलत पहचान या तथ्य छिपाने पर विवाह निरस्त करने और धोखाधड़ी या दबाव जैसे मामलों में कड़े दंड का प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि समानता स्थापित करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि कुछ समूहों द्वारा इस कानून को लेकर भ्रांतियाँ फैलाई जा रही हैं, जिन्हें तथ्यों के आधार पर दूर किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, डॉ. धन सिंह रावत, सांसद नरेश बंसल, विधायक खजान दास सहित कई जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और यूसीसी समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

