नई दिल्ली: आजकल पैकेट बंद और बाहर का खाना लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। स्वाद और सुविधा के कारण यह खान-पान भले ही आसान लगता हो, लेकिन लंबे समय में इसका असर पाचन तंत्र पर पड़ता है। गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे में खानपान में बदलाव बेहद जरूरी है, और रागी (मंडुआ) एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है।
आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, रागी में मौजूद पोषक तत्व पाचन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। खासकर जिन लोगों को सुबह पेट साफ न होने की समस्या रहती है, उनके लिए रागी फायदेमंद मानी जाती है।
रागी में सॉल्यूबल और नॉन-सॉल्यूबल फाइबर दोनों पाए जाते हैं। फाइबर मल को नरम बनाता है और बाउल मूवमेंट को नियमित करने में मदद करता है। नियमित सेवन से कब्ज की समस्या में राहत मिल सकती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि रागी में प्राकृतिक रूप से एल्कलाइन गुण पाए जाते हैं, जो पेट में बनने वाले अतिरिक्त एसिड को संतुलित करने में मदद कर सकते हैं। इससे खट्टी डकार और गैस की समस्या कम हो सकती है।
रागी में मौजूद कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट धीरे पचते हैं, जिससे पेट देर तक भरा हुआ महसूस होता है। इससे बार-बार भूख नहीं लगती और वजन नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।
अच्छी सेहत का संबंध सीधे पेट से माना जाता है। रागी में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो आंतों में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देने में सहायक हो सकते हैं। इससे पाचन बेहतर होता है और शरीर पोषक तत्वों को अच्छी तरह अवशोषित कर पाता है।
रागी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम माना जाता है, इसलिए सीमित मात्रा में यह मधुमेह रोगियों के लिए भी उपयुक्त आहार विकल्प हो सकता है (डॉक्टर की सलाह जरूरी है)। यह मेटाबॉलिज्म को संतुलित रखने में भी मदद कर सकता है।
रागी को रोटी, दलिया, डोसा, इडली या पोरिज के रूप में खाया जा सकता है। रात के भोजन में हल्के रूप में शामिल करने से कई लोगों को सुबह बेहतर पाचन का अनुभव होता है।
ध्यान दें: हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है। अगर कब्ज की समस्या लंबे समय से बनी हुई है या गंभीर है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

