जिला मुख्यालय: जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने जिला स्वास्थ्य समिति (DHS) की बैठक में किशोर-किशोरियों को एनीमिया से बचाने के लिए विद्यालयों में चल रहे आयरन फोलिक एसिड (IFA) अनुपूरण कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी स्कूलों में शिक्षकों और अभिभावकों को इस कार्यक्रम के प्रति जागरूक किया जाए तथा प्रत्येक सोमवार IFA गोली खिलाने की गतिविधि का नियमित अनुश्रवण सुनिश्चित किया जाए।
एनआईसी सभागार में आयोजित बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत संचालित विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की गई। एनीमिया मुक्त भारत अभियान की प्रगति पर चर्चा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि 10 से 19 वर्ष आयु वर्ग के सभी किशोर-किशोरियों को निर्धारित मानकों के अनुसार आयरन फोलिक एसिड की गोलियां दी जानी चाहिए और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं होगी।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत ने सुझाव दिया कि अभिभावकों और शिक्षकों में जागरूकता बढ़ाने के लिए विद्यालयों में किसी एक सोमवार को विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। वहीं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राम प्रकाश ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, आरकेएसके, आशा कार्यक्रम, आरबीएसके तथा राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम की प्रगति और उपलब्धियों की जानकारी दी।
पीसीपीएनडीटी कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने सभी पंजीकृत अल्ट्रासाउंड केंद्रों की नियमित जांच सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए, ताकि कानून का सख्ती से पालन हो सके।
बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी अजय चौधरी, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सीमा टेकचंदानी, डीटीओ डॉ. कुणाल चौधरी, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. एस.के. द्विवेदी, एसपीओ रिचा कोठियाल, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी ऊखीमठ डॉ. गोपाल सजवाण, डॉ. अक्षिता मंमगाईं, डॉ. राधिका जोशी, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका हरेंद्र सिंह, एटीओ राकेश रोशन पंत, डॉ. दीपाली नौटियाल, जिला कार्यक्रम प्रबंधक हिमांशु नौडियाल सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि किशोरों में एनीमिया की रोकथाम जनस्वास्थ्य की प्राथमिकता है और इसमें स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग तथा अभिभावकों की संयुक्त भागीदारी बेहद जरूरी है।

