गाजियाबाद (उ.प्र.) — गाजियाबाद की एक हाउसिंग सोसाइटी में तीन सगी बहनों द्वारा कथित आत्महत्या किए जाने का मामला सामने आया है। पुलिस जांच के दौरान कमरे से मिली एक डायरी ने इस दुखद घटना के पीछे चल रहे भावनात्मक और मानसिक तनाव की ओर इशारा किया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और फिलहाल किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बहनों ने अपने लिखित नोट्स में विदेशी पॉप संस्कृति, खासकर कोरियन मनोरंजन जगत, संगीत और ड्रामा के प्रति गहरी भावनात्मक जुड़ाव का जिक्र किया है। उन्होंने अपनी पहचान, पसंद और भविष्य को लेकर परिवार से मतभेद महसूस होने की बात लिखी थी। डायरी में यह भी संकेत मिलता है कि विवाह को लेकर पारिवारिक अपेक्षाएं और उनकी व्यक्तिगत इच्छाओं के बीच टकराव उन्हें मानसिक रूप से परेशान कर रहा था।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बरामद डायरी की सामग्री की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है। परिवार के सदस्यों और परिचितों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि यह समझा जा सके कि बहनें किन परिस्थितियों से गुजर रही थीं।
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि किशोर और युवा उम्र में पहचान, पसंद और सामाजिक स्वीकृति को लेकर तनाव बढ़ सकता है। अगर संवाद की कमी हो और भावनात्मक सहारा न मिले, तो व्यक्ति खुद को अलग-थलग महसूस करने लगता है। ऐसे समय में परिवार का सहयोग, खुली बातचीत और पेशेवर काउंसलिंग बेहद अहम होती है।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि डिजिटल दुनिया और मनोरंजन से जुड़ाव स्वाभाविक है, लेकिन जब कल्पनात्मक दुनिया और वास्तविक जीवन के बीच संतुलन बिगड़ जाता है, तो मानसिक दबाव बढ़ सकता है।
यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि मानसिक स्वास्थ्य को गंभीरता से लेना जरूरी है। परिवारों को चाहिए कि वे बच्चों और युवाओं की भावनाओं, पसंद और उलझनों को समझने की कोशिश करें। संवाद की कमी कई बार अंदरूनी तनाव को बढ़ा देती है।
अगर आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव, निराशा या आत्मघाती विचारों से जूझ रहा है, तो तुरंत मदद लें।
📞 राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन ‘किरण’ – 1800-599-0019 (24×7)
मदद मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि साहस का कदम है।

