नई दिल्ली: संसद में सिविल एविएशन मंत्री के बयान के अनुसार देश की प्रमुख एयरलाइनों के लगभग 50% विमानों में बार-बार तकनीकी खराबी पाई गई है। लोकसभा में गुरुवार को पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार इंडिगो और एयर इंडिया ग्रुप की एयरलाइनों के विमान तकनीकी गड़बड़ियों के मामले में सबसे अधिक प्रभावित रहे हैं।
सरकार ने बताया कि जून 2025 से जनवरी 2026 तक छह निर्धारित एयरलाइनों के कुल 754 विमानों की विस्तृत जांच की गई, जिनमें से 377 विमान यानी करीब 50% में बार-बार खराबी पाई गई।
इंडिगो एयरलाइंस के 405 विमानों का विश्लेषण किया गया। इनमें 148 विमान (लगभग 36%) में बार-बार खराबी पाई गई, जो विमानों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती हैं।
एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के 267 विमानों की जांच में 191 विमान में दुहराई जाने वाली खराबी पाई गई। एयर इंडिया के 166 में से 137 विमानों (लगभग 82%) में नियमित तकनीकी गड़बड़ियां मिलीं। एयर इंडिया एक्सप्रेस के 101 में से 54 विमानों में इसी तरह की समस्याएं थीं। आंकड़ों के अनुसार, एयर इंडिया ग्रुप के विमानों की खराबी दर अब तक सब से अधिक दर्ज की गई है।
अन्य एयरलाइनों की स्थिति
- स्पाइसजेट के 43 विमानों में से 16 में बार-बार खराबी मिली।
- अकासा एयर के 32 विमानों में से 14 में तकनीकी खामियों का पता चला।
एयर इंडिया के प्रवक्ता ने इन रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एयरलाइन ने बेड़े में अत्यधिक सावधानी और व्यापक जांच की है, जिससे खराबी की संख्या अधिक दिख रही है।
एयर इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अधिकांश गड़बड़ियां डी कैटेगरी से संबंधित हैं, जैसे:
- सीटें,
- ट्रे टेबल,
- स्क्रीन आदि।
इन समस्याओं को सुरक्षा-संबंधी गंभीर दोष नहीं माना गया है और इनका विमान की उड़ान सुरक्षा पर प्रत्यक्ष असर नहीं है।
नियामक संस्था डीजीसीए (Directorate General of Civil Aviation) ने पिछले वर्ष से निरीक्षण और निगरानी गतिविधियों को तीव्र किया है।
लोकसभा में जानकारी दी गई कि:
- 3,890 निगरानी निरीक्षण
- 56 नियामक ऑडिट
- 84 विदेशी विमानों की निगरानी जांच
- 492 रैंप निरीक्षण
- 874 स्पॉट चेक
- 550 रात्रि निरीक्षण
जैसी गतिविधियाँ की गईं, ताकि बेड़े की तकनीकी स्थिति की समग्र रूप से बेहतर तस्वीर मिल सके।
सांसदों को बताया गया कि डीजीसीए के पास 2022 में 637 स्वीकृत तकनीकी पद थे, अब इसे बढ़ाकर 1,063 पद कर दिया गया है, ताकि कर्मचारियों की कमी से उत्पन्न समस्याओं को दूर किया जा सके।
यह आंकड़ा दर्शाता है कि हाल के समय में विमानों की रख-रखाव जांच बहुत व्यापक और सख्त हुई हैं, जिससे तकनीकी गड़बड़ियों की पहचान बढ़ी है। हालांकि एयरलाइनों का कहना है कि ज्यादातर समस्याएं सुरक्षा को प्रभावित नहीं करतीं, लेकिन यह स्थिति यात्रियों की चिंता का विषय बनी हुई है और नियामक निरीक्षण और निगरानी आगे भी जारी रहने की संभावना है।

