किशिनाउ। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध का असर अब पड़ोसी मोल्दोवा में भी साफ दिखाई दे रहा है। यूक्रेन में एक हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्लांट पर रूसी हमले के बाद मोल्दोवा में गंभीर जल संकट उत्पन्न हो गया है, जिससे हजारों लोग प्रभावित हुए हैं।
बताया जा रहा है कि हमले के बाद तेल जैसी प्रदूषक सामग्री डनिस्टर नदी में मिल गई, जो यूक्रेन और मोल्दोवा दोनों से होकर गुजरती है। इसी वजह से मोल्दोवा में पेयजल आपूर्ति प्रभावित हुई और हालात बिगड़ गए।
मोल्दोवा की राष्ट्रपति माइया सैंडू ने इस संकट के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के नोवोद्निस्ट्रोव्स्क हाइड्रोपावर प्लांट पर हमला मोल्दोवा के जल संसाधनों के लिए गंभीर खतरा बन गया है।
जिस हाइड्रोपावर प्लांट को निशाना बनाया गया, वह मोल्दोवा की करीब 25 लाख आबादी में से लगभग 80 प्रतिशत लोगों को पानी उपलब्ध कराता है। हमले के बाद:
- कई जिलों में पानी की आपूर्ति रोकनी पड़ी
- दूसरे सबसे बड़े शहर बाल्टी में भी संकट गहरा गया
- स्कूलों को बंद कर ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करनी पड़ी
- आपातकाल घोषित, सेना उतरी मैदान में
- स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मोल्दोवा के पर्यावरण मंत्रालय ने पर्यावरण आपातकाल घोषित कर दिया है।
- पानी की आपूर्ति पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए गए
- सेना को टैंकरों के जरिए पीने का पानी वितरित करने के लिए लगाया गया
- पड़ोसी रोमानिया से भी मानवीय सहायता मिल रही है
जल संकट के कारण आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बुजुर्ग और बीमार लोगों के लिए हालात और भी कठिन हो गए हैं। कई परिवारों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी जुटाने में संघर्ष करना पड़ रहा है।
रूस-यूक्रेन युद्ध का यह नया असर दिखाता है कि संघर्ष का दायरा सीमाओं से बाहर निकलकर पड़ोसी देशों तक पहुंच रहा है। मोल्दोवा में गहराता जल संकट मानवीय और पर्यावरणीय चुनौती के रूप में उभर रहा है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।

