नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय नौसेना ने होरमुज़ जलडमरूमध्य के आसपास भारतीय जहाजों की सुरक्षा के लिए अरब सागर और ओमान की खाड़ी में अतिरिक्त युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। इस कदम का मकसद भारतीय ईंधन और एलपीजी टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।
सूत्रों के अनुसार:
- 6 से अधिक युद्धपोत, जिनमें रसद (लॉजिस्टिक) जहाज भी शामिल हैं, तैनात किए गए हैं
- ये जहाज जलडमरूमध्य के भीतर नहीं जाएंगे, बल्कि उसके पूर्वी हिस्से में रहेंगे
- मुख्य भूमिका भारतीय जहाजों को सुरक्षित जलक्षेत्र तक एस्कॉर्ट करना है
हाल ही में भारत ने दो एलपीजी टैंकर:
- शिवालिक
- नंदा देवी
को सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य पार कराया है।
भारत ईरान के साथ लगातार संपर्क में है ताकि और जहाजों की आवाजाही सुचारू हो सके।
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद से इस क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
- भारत का लगभग 90% LPG आयात मध्य पूर्व से आता है
- कुल तेल आयात का 40-50% इसी मार्ग से गुजरता है
इस वजह से भारत के लिए यह मार्ग रणनीतिक रूप से बेहद अहम है।
यह तैनाती ऑपरेशन संकल्प के तहत की गई है, जो 2019 से खाड़ी क्षेत्र में भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है। 22 से अधिक भारतीय जहाज इस समय क्षेत्र में फंसे या प्रतीक्षा में हैं, नौसेना उनके एस्कॉर्ट और निगरानी में जुटी है
भारत ने अमेरिका के साथ संयुक्त सुरक्षा पहल में शामिल होने से इनकार किया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस मुद्दे पर वाशिंगटन के साथ कोई द्विपक्षीय बातचीत नहीं हुई है, हालांकि भारत विभिन्न हितधारकों के साथ संपर्क में बना हुआ है।
होरमुज जलडमरूमध्य में बढ़ते खतरे के बीच भारतीय नौसेना की यह सक्रिय तैनाती देश की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए एक अहम कदम मानी जा रही है।

