नई दिल्ली। आम जनता के लिए जरूरी दवाओं को लेकर अहम खबर सामने आई है। 1 अप्रैल 2026 से करीब 900 दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी होने जा रही है। यह फैसला राष्ट्रीय औषधि मूल्य प्राधिकरण के निर्देश के बाद लिया गया है।
कीमत बढ़ने वाली दवाओं में शामिल हैं:
दर्द निवारक दवाएं
एंटीबायोटिक दवाएं
इनकी कीमतों में करीब 0.65% तक की बढ़ोतरी होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार यह बढ़ोतरी एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है।
भारतीय औषधि उद्योग परिसंघ के सलाहकार विनोद कलानी ने कहा कि:
👉 यह वृद्धि राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची में शामिल दवाओं पर लागू होती है
👉 इसका पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से कोई संबंध नहीं है
सरकार के अनुसार:
वर्ष 2025 में थोक मूल्य सूचकांक में 0.64956% की वृद्धि हुई
इसी आधार पर दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) में बढ़ोतरी की अनुमति दी गई है
दवा (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 के तहत:
दवा कंपनियां WPI के आधार पर MRP बढ़ा सकती हैं
इसके लिए सरकार से अलग से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी
पश्चिम एशिया संकट के संभावित प्रभावों को देखते हुए
नरेंद्र मोदी ने 7 अधिकार प्राप्त समितियों का गठन किया है।
इनका उद्देश्य:
ईंधन, गैस और उर्वरक आपूर्ति बनाए रखना
सप्लाई चेन को सुरक्षित रखना
महंगाई को नियंत्रित करना
दवाओं की कीमतों में यह हल्की बढ़ोतरी भले ही कम लगे, लेकिन बड़े पैमाने पर इसका असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है। हालांकि सरकार का कहना है कि यह एक नियमित प्रक्रिया है और महंगाई को नियंत्रण में रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

