वॉशिंगटन/तेहरान। United States और Iran के बीच हुए दो सप्ताह के युद्धविराम समझौते को लेकर Israel ने नाराजगी जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस समझौते को अंतिम रूप देते समय इजरायल को वार्ता प्रक्रिया से बाहर रखा गया।
दोनों देशों के बीच हुए इस सीजफायर में ईरान ने Strait of Hormuz को फिर से खोलने पर सहमति जताई थी, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बहाल होने की उम्मीद जगी।
इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने सार्वजनिक रूप से इस फैसले का समर्थन किया, लेकिन शर्त भी रखी। उन्होंने कहा कि:
ईरान तुरंत होर्मुज जलडमरूमध्य खोले
अमेरिका, इजरायल और क्षेत्रीय देशों पर हमले बंद करे
हालांकि उन्होंने साफ किया कि यह युद्धविराम लेबनान पर लागू नहीं होता।
सीजफायर के बावजूद इजरायल ने लेबनान में Hezbollah के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन हमलों में 89 लोगों की मौत और 700 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि लेबनान पर हमले जारी रहे, तो वह अमेरिका के साथ हुए युद्धविराम से पीछे हट सकता है।
ईरानी मीडिया के अनुसार, लेबनान में हमलों के बाद टैंकर मार्ग को फिर से बंद करने की बात भी सामने आई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने स्पष्ट किया कि यह समझौता केवल अमेरिका और ईरान के बीच था और इसमें लेबनान या हिजबुल्लाह को शामिल नहीं किया गया।
उन्होंने कहा, “हिजबुल्लाह इस समझौते का हिस्सा नहीं है, इसलिए लेबनान की स्थिति अलग है।”
मध्य-पूर्व में यह सीजफायर फिलहाल सीमित दायरे में है। Israel की नाराजगी और लेबनान में जारी हमलों के कारण क्षेत्र में तनाव अभी भी बरकरार है, जिससे आने वाले दिनों में हालात और जटिल हो सकते हैं।

