प्रदेश सरकार द्वारा राज्य आंदोलनकारियों के चिह्नीकरण की घोषणा को लेकर अभी शासनादेश का इंतजार

प्रदेश सरकार द्वारा राज्य आंदोलनकारियों के चिह्नीकरण की घोषणा को लेकर अभी शासनादेश का इंतजार है। मुख्यमंत्री ने कुछ समय पहले आंदोलनकारियों के चिह्नीकरण की तिथि 31 दिसंबर 2021 तक बढ़ाने की घोषणा की थी। इससे तकरीबन छह साल से लंबित चल रही इस प्रक्रिया के फिर से शुरू होने की उम्मीद जगी है।प्रदेश में इस समय तकरीबन 10 हजार राज्य आंदोलनकारी चिह्नित हैं, जिन्हें सरकार पेंशन दे रही हैं। इन आंदोलनकारियों का चार वर्गों में चिह्नीकरण किया गया है। पहले वर्ग में वह हैं जिन्हें सात दिन से अधिक की जेल हुई हैं अथवा जो घायल हुए। इस वर्ग के आंदोलनकारियों को शुरुआत में सरकारी सेवा में भी रखा गया था और आंदोलनकारियों को सरकारी सेवा में रखने के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण भी रखा गया था। हालांकि, कोर्ट ने क्षैतिज आरक्षण पर रोक लगा दी है, इस मसले पर सरकार सुप्रीम कोर्ट गई है। जिन्हें नौकरी नहीं मिली है, उन्हें 5100 रुपये की पेंशन दी जा रही है।

दूसरे वर्ग में वह आंदोलनकारी चिह्नित हैं जिन्होंने आंदोलन में हिस्सा लिया था। इनका चिह्नीकरण अखबारों की कटिंग और सरकारी दस्तावेजों के आधार पर किया गया है। इन्हें 3100 रुपये पेंशन दी जा रही है। सबसे अधिक इन्हीं की संख्या है। इनकी संख्या आठ हजार से अधिक है। तीसरी श्रेणी में शहीद आंदालनकारियों के स्वजन हैं। इन्हें भी 3100 रुपये मासिक पेंशन दिए जाने का प्रविधान है। चौथी श्रेणी में दिव्यांग आंदोलनकारी हैं। इन्हें 10 हजार रुपये पेंशन अनुमन्य हैं। प्रदेश में इनकी संख्या कुल दो है।इस समय प्रदेश के विभिन्न जिलों में आंदोलनकारियों के चिह्नीकरण के सैकड़ों आवेदन एकत्र हैं, जिन पर छह साल से सुनवाई नहीं हो पाई है। दरअसल, आंदोलनकारियों का चिह्नीकरण जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति करती है जो आवेदन के साथ लगे दस्तावेजों की जांच करने के बाद आंदोलनकारियों का चिह्नीकरण करती है। अब सरकार की घोषणा के बाद आंदोलनकारी शासनादेश का इंतजार कर रहे हैं।

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