ब्लैक फंगस के मरीजों को देहरादून में नहीं मिल पा रहे एंटी फंगल इंजेक्शन

देहरादून में बढ़ते ब्लैक फंगस के मामलों के बावजूद सरकार और स्वास्थ्य विभाग व्यवस्था बनाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। ब्लैक फंगस के मरीजों को देहरादून में एंटी फंगल इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है। शनिवार को विभिन्न अस्पतालों से बड़ी संख्या में लोग एंटी फंगल इंजेक्शन (एम्फोटेरेसिन) लेने के लिए सीएमओ दफ्तर पहुंचे, लेकिन उन्हें यहां इंजेक्शन नहीं मिल पाया। गेट से ही वापस भेजे जाने पर तीमारदारों ने नाराजगी जताते हुए जमकर हंगामा किया। मामले की जानकारी पाकर यहां पहुंचे कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना के साथ मिलकर तीमारदारों ने करीब एक घंटे तक यहां धरना दिया।

कोरोना के बाद अब ब्लैक फंगस भी देहरादून में तेजी से फैल रहा है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस बीमारी से जुड़ी दवा की भारी कमी है। जिसके चलते मरीज को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा। सरकार व्यवस्था बनाने का दावा तो कर रही है, लेकिन असल में मरीज को कहीं राहत नहीं मिल रही। शनिवार को देहरादून और ऋषिकेश से कई लोग सीएमओ दफ्तर में एंटी फंगल इंजेक्शन लेने पहुंचे। लेकिन यहां किसी को भी इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हो सका। गुस्साए लोग ने सीएमओ परिसर में अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। बात हाथ से बाहर निकलती देख कार्मिकों ने पुलिस को बुलाया। पुलिस ने मामला शांत करवाने का प्रयास किए, लेकिन तीमारदार अपनी मांग पर अड़े रहे। देहरादून निवासी सिद्धार्थ ने बताया कि उनकी एक रिश्तेदार इंद्रेश अस्पताल में भर्ती हैं। उनके इलाज के लिए डॉक्टर ने एंटी फंगल इंजेक्शन मंगवाया है। देहरादून में कहीं इंजेक्शन नहीं मिला। सीएमओ दफ्तर में इंजेक्शन मिलने की व्यवस्था बनाने के बाद पिछले दो दिन से यहां आ रहा हूं, लेकिन इंजेक्शन तो दूर उन्हें दफ्तर के कर्मचारियों की ओर से संतोषजनक जवाब तक नहीं दिया जा रहा। ऋषिकेश से सीएमओ दफ्तर इंजेक्शन लेने पहुंचे अयान ने बताया कि ऋषिकेश में कहीं भी इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है। उनके एक करीबी रिश्तेदार की हालत बिगड़ती जा रही है। सीएमओ दफ्तर में इंजेक्शन की व्यवस्था करने के दावे किए जा रहे हैं। इतनी दूर से जोखिम लेकर यहां पहुंचा तो पता चलता है यहां भी इंजेक्शन नहीं। आम लोग को धोखा देने से अच्छा है सरकार और स्वास्थ्य विभाग को असल बात लोग के सामने रखनी चाहिए।

सूचना पर मौके पर पहुंचे प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने तीमारदारों के साथ एक घंटे तक धरना दिया। उन्होंने सीएमओ डॉ. अनूप डिमरी और एसीएमओ डॉ. कैलाश गुंज्याल से अस्पतालों में व्यवस्था सुधारने और मरीजों के लिए दवा का इंतजाम करने की मांग की। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. तृप्ति बहुगुणा से फोन पर वार्ता की। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. तृप्ति बहुगुणा ने आश्वासन दिया कि एक-दो दिन में इंजेक्शन मिल जाएंगे, जिसके बाद मरीजों को दिक्कत नहीं होगी। इसके बाद धस्माना व तीमारदारों ने धरना समाप्त किया। इसके बाद एम्स ऋषिकेश, श्री महंत इंदिरेश अस्पताल, हिमालयन अस्पताल से आए स्वजन वापस चले गए। उनका नाम एवं नंबर सीएमओ दफ्तर में दर्ज करवाया दिया गया। उन्हें आश्वासन दिया गया कि इंजेक्शन आते ही उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दिया जाएगा।

शनिवार को सीएमओ दफ्तर में एंटीफंगल इंजेक्शन लेने पहुंचे लोग को इस बात का भी गुस्सा था कि इस मुश्किल समय में भी सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग उनका सहयोग नहीं कर रहे हैं। इंजेक्शन लेने पहुंचे सिद्धार्थ ने बताया कि शुक्रवार को भी वो इंजेक्शन लेने यहां पहुंचे थे तब सीएमओ दफ्तर की ओर से उन्हें ड्रग कंट्रोलर के पास जाने को कहा गया। ड्रग कंट्रोलर दफ्तर गए तो अधिकारियों ने हाथ खड़े करते हुए कह दिया इसकी पूरी जिम्मेदारी सीएमओ दफ्तर को ही दी गई है। उन्होंने सरकार पर भी अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि सरकार ने इंजेक्शन खुद वितरित करने का निर्णय तो ले लिया, लेकिन पर्याप्त इंजेक्शन ही नहीं मंगवाए गए हैं। अब कोई व्यक्ति अपने संसाधनों पर कहीं बाहर से इंजेक्शन भी नहीं मंगवा सकता। या तो सरकार पूरी व्यवस्था बनाए या फिर आमजन को राहत देने का दिखावा न करे।

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