हैदराबाद से AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार से चीन और पाकिस्तान को लेकर कड़े सवाल उठाए हैं और सरकार की विदेश नीति तथा सीमा पर सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं जताईं हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या भारत चीनी प्रयासों को रोकने में सफल रहा है, खासकर पाकिस्तान को सैन्य सहायता देने के मामले में।
ओवैसी ने क्या कहा?
🔹 ओवैसी ने सरकार से पूछा कि क्या भारत चीन को पाकिस्तान को सैन्य सहायता देने से रोकने में सक्षम रहा है? अगर ऐसा नहीं हो सका, तो “चीन के साथ हमारी दोस्ती का क्या मतलब है?” उन्होंने यह सवाल सीधे केंद्र से पूछा।
🔹 उन्होंने भारत-चीन सीमा (LAC) पर पूछताच की कि क्या भारतीय सेना अब उन सभी इलाकों में गश्त कर पा रही है जहाँ से वह अप्रैल 2020 से पहले गश्त करती थी। अगर नहीं, तो क्यों? और इतना बड़ा “बफर जोन” कब तक बना रहेगा?
🔹 ओवैसी ने कहा कि एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार लद्दाख में 2020 के बाद से चीन की सीमा पर बुनियादी ढांचे का विकास दोगुना हो गया है, और उन्होंने पूछा कि सरकार ऐसा होने कैसे दे रही है।
🔹 उन्होंने सवाल किया कि सरकार सीमा पर हथियार चलाने पर सेना पर लगाए गए प्रतिबंध का क्या कारण है — “क्या आप चीन से इतना डरते हैं?” और सरकार ने एलएसी के बारे में चीन की धारणा को बफर जोन के संदर्भ के रूप में अपनाया है, यह भी वह चुनौतियों में से एक बताते हैं।
ओवैसी ने यह बयान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर दिया और सरकार से पारदर्शिता की मांग की कि वास्तव में “हमने चीन के साथ क्या सौदा किया है?”
🔹 उन्होंने यह भी कहा कि संसद को खुलकर काम करने दिया जाना चाहिए, ताकि विपक्ष इन गंभीर सुरक्षा मुद्दों पर सवाल उठा सके।
लोकसभा में सरकार-विपक्ष के बीच सदन की कार्यवाही तब और तीव्र हो गई, जब आठ सांसदों को निलंबित कर दिया गया, और विपक्ष के नेता राहुल गांधी को 2020 के भारत-चीन संघर्ष से जुड़े एक लेख का हवाला देने की अनुमति नहीं दी गई।

