बागेश्‍वर जिले में जौलकांडे के जंगल रातभर धूं-धूं कर जलते रहे; जाने पूरी खबर

बागेश्‍वर जिले में जौलकांडे के जंगल रातभर धूं-धूं कर जलते रहे। गांव के लोग रात को ठीक से सो भी नहीं सके। जंगल की आग गांव तक पहुंचने की आशंका से परेशान रहे। उन्हें कई स्थानों पर पिरूल को समेटा और आग को फैलने से बचाया। वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। इधर, जंगल जलने से वातावरण में गहरा धुंआ फैल गया है।अभी अप्रैल चल रहा है और जंगलों की आग बेकाबू होने लगी है। एक के बाद एक जंगल जल रहा है। जिले में लगभग 66 प्रतिशत भू-भाग पर वन हैं। वन पंचायत के अलावा आरक्षित वनों में भी आग लगने लगी है। धरमघर क्षेत्र के तमाम जंगल पिछले चार दिनों से जल रहे हैं। वहीं जिला मुख्यालय से महज आठ किमी दूर जौलकांडे गांव के वनों में भी गत गुरुवार की रात भयंकर आग लग गई। जिला मुख्यालय से वन विभाग की टीम भी गांव पहुंची। ग्रामीणों के साथ मिलकर टीम ने आग को गांव की तरफ आने से रोका। जिला बार ऐसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद भट्ट ने कहा कि वन विभाग वनों के प्रति उदासीन बना हुआ है।

आग लगाने वालों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। जिससे उनके हौंसले बुलंद हैं। उन्होंने कहा कि अभी अप्रैल में इस तरह जंगल जल रहे हैं, तो मई-जून में विभाग इसे कैसे संभालेगा। तब गर्मी चरम पर होती है। गांव के ग्राम प्रधान प्रिया उप्रेती, वन पंचायत सरपंच नरेश उप्रेती, उपप्रधान नैना लोहनी, अशोक लोहनी आदि ने बताया कि वन जलने से वन संपदा पूरी तरह खाक हो गई है। नए पौध भी आग की भेंट चढ़ गए हैं। इधर, डीएफओ बीएस शाही ने कहा कि आग पर लगातार काबू पाया जा रहा है।

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