भिक्षावृत्ति का व्यवसाय रूप उत्तराखंड में विचारनिय विषय; जाने पूरी खबर

उत्तराखंड में अब भिक्षावृत्ति एक व्यवसाय का रूप लेने लगी है। स्थिति यह है कि हर शनिवार व प्रमुख पर्वों पर प्रदेश के तीर्थ स्थानों व मुख्य शहरों में दूसरे राज्यों से आने वाले भिखारियों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। यह स्थिति तब है जब उत्तराखंड में सार्वजनिक स्थलों पर भिक्षावृत्ति पर प्रतिबंध लगा हुआ है। प्रदेश सरकार ने इसके भिक्षावृत्ति निषेध अधिनियम भी लागू किया गया। इस अधिनियम में यह कहा गया है कि सार्वजनिक स्थलों पर भीख मांगते या देते हुए पकड़े जाने पर यह अपराध की श्रेणी में होगा और इसमें बगैर वारंट गिरफ्तारी भी हो सकती है। दूसरी बार अपराध सिद्ध होने पर सजा की अवधि पांच साल तक हो सकती है। निजी स्थलों पर भिक्षावृत्ति की लिखित और मौखिक शिकायत पर अधिनियम की धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। नाम के लिए कानून तो बना लेकिन भिक्षावृत्ति पर रोक नहीं लग पाई।

उत्तराखंड की चारधाम यात्रा की शुरूआत कब हुई इसका कोई लिखित वर्णन नहीं है। हालांकि, कई पुरानी पुस्तकों में इसका उल्लेख जरूर मिलता है। ऐेसे में बीते वर्ष पर्यटन विभाग ने चारधाम यात्रा मार्ग को सबसे प्राचीनतम यात्रा मार्ग के रूप में मान्यता दिलाने को कदम बढ़ाए। इसके लिए देश-विदेश के श्रद्धालुओं और बुद्धिजीवियों से सहयोग लेने का निर्णय लिया गया। कहा गया कि किसी के पास भी ऐसे दस्तावेज, फोटोग्राफ अथवा पांडुलिपि हों जिसमें इस मार्ग का उल्लेख किया गया है तो वह इन्हें पर्यटन विभाग को उपलब्ध करा सकता है। इसके लिए बकायदा ऐसे व्यक्तियों को पुरस्कृत करने की योजना भी बनाई गई। विभाग को उम्मीद थी कि इसकी अच्छी प्रतिक्रिया देखने को मिलेगी। अफसोस कि प्रचार प्रसार के अभाव में यह कवायद परवान नहीं चढ़ पाई। न तो किसी ने विभाग को दस्तावेज दिया और न ही संपर्क किया। ऐसे में यह योजना शुरूआत में ही दम तोड़ गई।

About Surkanda Samachar

View all posts by Surkanda Samachar →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *