बेथाण गांव में भूस्खलन व भू-धंसाव से दहशत में हैं ग्रामीण

  • कई मकानों में पड़ चुकी दरारें, कमरों से निकल रहा पानी
  • दो परिवार खाली कर चुके हैं मकान
    नई टिहरी।
    बेथाण गांव में हो रहे भूस्खलन व भू-धंसाव ने ग्रामीणों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। कई मकान खतरे की जद में आ गए हैं। यहां दो बड़े मकानों में दरारें व पानी आने से प्रभावित परिवारों ने मकान खाली कर अन्यत्र शरण ली है। स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों का कहना है कि विस्थापन ही उनकी समस्या का एक मात्र समाधान है, इसलिए इस दिशा में कार्यवाही की जाए।
    प्रखंड प्रतापनगर की ग्राम पंचायत गैरी राजपूतों के अन्तर्गत बेथाण गांव के ग्रामीण आजकल भय के माहौल में जी रहे हैं। यहां पिछले दस दिनों से एक ओर भूस्खलन तो दूसरी ओर भू-धंसाव होने ग्रामीण दहशत में हैं। स्थिति यह है कि एक ओर गांव के किनारे गदेरे वाली जगह पर भूस्खलन हो रहा है तो दूसरी ओर गांव का एक बड़ा भू-भाग धंस रहा है। इससे गांव के कई मकान खतरे की जद में आ गए हैं। यहां सुन्दर सिंह व रामधन सिंह के दो बड़े मकानों की दीवारों व छतों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं साथ ही कमरों से पानी बहने लगा है। जिसके चलते दोनों प्रभावित परिवारों ने मकानों को खाली कर अन्यत्र शरण ली है। इसके अलावा तीन अन्य बचन सिंह, बालम ंिसंह, आनन्द सिंह के मकानों में भी दरारें आ गई हैं जो दिन-प्रतिदिन चैड़ी होती जा रही हैं। इससे वे चिंतित व भयभीत हैं। प्रभावित ग्रामीण सुन्दर सिंह का कहना है कि उन्हेांने बड़ी मेहनत करके अपनी जमा पूंजी से करीब चालीस लाख रूपए की लागत से दो मंजिला जो मकान बनाया था वह भू-धंसाव के कारण छतिग्रस्त हो गया है और जिस प्रकार खतरा बढ़ता जा रहा है उससे गांव में रहना भी खतरे से खाली नही है। इसलिए उनका विस्थापन किया जाए। वहीं रामधन सिंह का कहना है कि जो पैतृक मकान था व छतिग्रस्त हो गया है जिससे खाली कर वे दूसरी जगह रह रहे हैं अब उनके पास ऐसी सुरक्षित जगह भी नही हैं जहां वे नया मकान बना सकें। चिंताजनक बात यह है कि यहां पिछले दस दिनों से भू-धंसाव बढ़ता जा रहा है और भूस्खलन भी हो रहा है।
    तीन वर्ष पूर्व भी भूस्खलन से हुआ था नुकसान
    गांव में करीब तीन वर्ष पूर्व भूस्खलन हुआ था उस समय गांव के पैदल मार्ग, खेत, पेयजल लाइनें, सिंचाई नहरें और पंचायत घर क्षतिग्रस्त हो गया था। अब पुराना वाला भूस्खलन जोन फिर सक्रिय हो गया है। इससे गांव की पेयजल लाइन भी छतिग्रस्त हो गई थी, जिससे गांव में पेयजल का संकट गहरा गया है। ग्रामीणों के लिए चिंताजनक बात यह है कि एक ओर भूस्खलन हो रहा तो दूसरी ओर गांव के उपर की जमीन धंस रही है। यदि समय रहते सुरक्षा के उपाय नही किए गए तो आने वाले दिनों में बड़ा नुकसान भी हो सकता है। वर्तमान में जो स्थिति है उसको देखते हुए ग्रामीण अपने विस्थापन की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि विस्थापन ही समस्या का एकमात्र समाधान है।
    वैसे तो गांव में प्रशासन की टीम भी पहुंची और ज्यादा प्रभावित परिवारों को प्रशासन की टीम ने एक से डेढ़ लाख रूपए तक की आर्थिक सहायता भी दी लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि इससे उनकी समस्या हल नही हो पायेगी। उनका कहना है कि इससे वे एक कमरा भी नही बना पायेंगे। ग्रामीणों की मांग है कि उनकी उचित मुआवजा दिया जाए और उनका विस्थापन किया जाए। पूर्व राज्य मंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता अतर सिंह तोमर ने भी प्रभावित गांव का भ्रमण किया और ग्रामीणों की समस्याओं को जाना। उन्होंने कहा कि वे ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर जल्द ही मुख्यमंत्री से मिलेंगे और उनको उचित मुआवजा देने और विस्थापन की मांग करेंगे। साथ ही गांव का भूगर्भीय सर्वेंक्षण कराने के निर्देश भी जारी करवायेंगे।

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