देवभूमि, उत्तराखंड: उत्तराखंड में चारधाम शीतकालीन यात्रा के सफल संचालन से पहाड़ों में नई जान फूंक दी गई है। चारधाम के कपाट बंद होने के बाद भी श्रद्धालु और पर्यटक पवित्र स्थलों के दर्शन कर रहे हैं, जिससे शीतकालीन वीरानी दूर हो गई है।
शीतकालीन गद्दीस्थलों में यात्रियों की संख्या
- इस वर्ष अब तक 34,140 यात्रियों ने शीतकालीन गद्दीस्थलों में दर्शन किए हैं।
- सबसे अधिक यात्री केदारनाथ के गद्दीस्थल ऊखीमठ पहुंचे — 20,338 दर्शनकर्ता।
अन्य स्थलों जैसे पांडुकेश्वर‑ज्योतिर्मठ, मुखबा और खरसाली में भी लगातार यात्रियों का आगमन हो रहा है।
प्रतिदिन लगभग 1,000–1,500 यात्री चारधाम के शीतकालीन स्थलों में दर्शन कर रहे हैं।
शीतकालीन यात्रा के बढ़ते प्रभाव से पर्यटक स्थलों में भी भीड़ बढ़ी है।
राज्य में स्नो लेपर्ड टूर, टूर एंड ट्रैवल्स कान्क्लेव जैसे आयोजनों के माध्यम से पर्यटकों को आकर्षित किया जा रहा है।
यात्रियों के आने से स्थानीय लोगों का रोजगार भी बढ़ रहा है और पर्यटन उद्योग में सकारात्मक असर दिख रहा है।
पिछली बार से तुलना
वर्ष 2024‑25 में पहली बार शीतकालीन यात्रा शुरू हुई थी, तब 73,381 यात्रियों ने उत्तराखंड में शीतकालीन यात्रा का आनंद लिया था।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछली बार यात्रा का प्रमोशन किया था, जिसके परिणाम अब स्पष्ट दिख रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा:
“चारधाम के शीतकालीन गद्दीस्थलों और पर्यटक स्थलों में यात्रियों की बढ़ती संख्या से देवभूमि में नई ऊर्जा आई है। बारहमासी यात्रा की सफलता से न केवल श्रद्धालुओं को सुविधा मिली है, बल्कि स्थानीय लोगों का रोजगार भी फल-फूल रहा है।”
उत्तराखंड में शीतकालीन यात्रा अभी लगभग ढाई माह तक चलेगी, और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में और अधिक श्रद्धालु और पर्यटक पहाड़ों का सौंदर्य और चारधाम का पवित्र अनुभव लेने आएंगे।

