मुख्यमंत्री धामी ने आस्तियों व दायित्वों के लंबित प्रकरणों के त्वरित निस्तारण को कदम उठाए जाएं के निर्देश दिए

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मध्य परिसंपत्तियों के बटवारे को लेकर धामी सरकार सक्रिय हो गई है। इस कड़ी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार शाम हुई बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि आस्तियों व दायित्वों के लंबित प्रकरणों के त्वरित निस्तारण को कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग ठीक से होमवर्क कर 10 अक्टूबर तक अपनी कार्ययोजना तैयार करना सुनिश्चित करें, ताकि दोनों राज्यों के मुख्य सचिव स्तर की अक्टूबर में होने वाली बैठक में राज्य का पक्ष मजबूती से रखने के साथ ही नीतिगत निर्णय लेने को आपसी सहमति बन सके।राज्य पुनर्गठन विभाग के तत्वावधान में मुख्यमंत्री आवास में हुई बैठक में मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि मुख्य सचिवों की बैठक में होने वाले विमर्श के बाद संबंधित विषयों पर अंतिम निर्णय लेने के बारे में वह स्वयं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से वार्ता करेंगे। उन्होंने कहा कि परिसंपत्तियों के प्रकरणों का राज्यहित में निस्तारण जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी संबंधित विभाग दोनों राज्यों के विषयों का स्पष्ट विवरण भी तैयार करें, ताकि आगामी बैठकों में इन पर निर्णय लेने में सुविधा हो। उन्होंने केंद्र के स्तर पर लिए जाने वाले निर्णयों और सुप्रीम कोर्ट में लंबित प्रकरणों में प्रभावी पैरवी के निर्देश भी दिए। इस संबंध में उन्होंने सचिव ऊर्जा के साथ किसी उच्चाधिकारी को नामित करने को भी कहा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि टीएचडीसी में उत्तर प्रदेश सरकार की अंशपूंजी उत्तराखंड को हस्तांतरित करने का प्रकरण वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इसके लिए भी प्रभावी पैरवी कर मजबूती के साथ राज्य का पक्ष रखा जाए। बैठक में कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, मुख्य सचिव डा एसएस संधु, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री आनंद वद्र्धन, सचिव शैलेश बगौली, आर मीनाक्षी सुंदरम, विशेष सचिव मुख्यमंत्री डा पराग मधुकर धकाते समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद थे।सचिव पुनर्गठन डा रणजीत सिन्हा ने मुख्यमंत्री को उन विषयों की जानकारी दी, जिनमें निर्णय होना अपेक्षित है। उन्होंने बताया कि इन विषयों में सिंचाई विभाग उत्तराखंड को ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार व चम्पावत जिलों में 379.385 हेक्टेयर भूमि का हस्तांतरण, हरिद्वार में आवासीय व अनावासीय भवनों का हस्तांतरण, गंग नहर से 665 क्यूसेक जल की उपलब्धता, ऊधमसिंह नगर व हरिद्वार की नहरों पर हक, नानक सागर, धौरा व बेंगुल जलाशय की पर्यटन एवं जलक्रीड़ा के लिए उपलब्धता, टीएचडीसी में उत्तर प्रदेश की अंशपूंजी का उत्तराखंड को हस्तांतरण, मनेरी भाली जल विद्युत परियोजना को लिए गए ऋण का समाधान समेत परिवहन, वित्त, आवास, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, वन, कृषि से संबंधित विषय शामिल हैं।

 

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