वस्त्र उद्योग को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अहम योगदान को तैयार उत्तराखंड

उत्तराखंड देश के वस्त्र उद्योग को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अहम योगदान को तैयार है। आस्ट्रेलिया से हर साल 1200 करोड़ की विदेशी मुद्रा से आयात की जा रही महीन ऊन की आपूर्ति महज तीन से चार वर्ष में ही करने में प्रदेश सक्षम है। प्रदेश की जलवायु में आस्ट्रेलिया की 240 मेरिनो भेड़ रच-बस गईं हैं। इससे उत्साहित मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पाती भेजी है। उन्होंने वस्त्र उद्योग में मजबूती से कदम बढ़ाने के उत्तराखंड के हौसले का जिक्र करते हुए और मेरिनो भेड़ उपलब्ध कराने में मदद मांगी है।मेरिनो भेड़ से मिलने वाली गुणवत्तायुक्त महीन ऊन योजना का खास फायदा प्रदेश के सीमांत भेड़पालकों को होगा। उनकी आमदनी में इस योजना के बूते बड़ा इजाफा होना तय माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह चुके हैं कि उत्तराखंड के पर्वतीय और सीमांत क्षेत्रों से जवानी और पलायन को रोका जाएगा।

पलायन रोकने और रिवर्स पलायन के लिए ताकत झोंक रही त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार महीन ऊन योजना के जरिये प्रदेश में प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा होती देख रही है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में बताया कि दिसंबर, 2019 में आस्ट्रेलिया से आयात की गईं 240 मेरिनो भेड़ों को टिहरी जिले के राजकीय भेड़ प्रजनन प्रक्षेत्र, कोपड़धार में रखा गया। भेड़ों ने राज्य की ठंडी और बर्फीली जलवायु को अपना लिया है। खास बात ये रही है कि इस तालमेल में किसी भेड़ की क्षति नहीं हुई। आयातित मेरिनो भेड़ों से इस साल क्रास ब्रीडिंग के माध्यम से नई संतति मिलने जा रही है। प्रजनन केंद्र पर पैदा हुईं नर भेड़ों को राज्य के भेड़पालकों को सामुदायिक कृत्रिम गर्भाधान एवं प्राकृतिक गर्भाधान से नस्ल एवं ऊन सुधार के लिए वितरित किया जाएगा।

इस प्रयोग की कामयाबी से उत्साहित राज्य सरकार को अच्छी गुणवत्ता की ऊन का उत्पादक बनने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश आस्ट्रेलिया से उक्त भेड़ों की करीब 15 हजार मीट्रिक टन महीन ऊन आयात कर रहा है। इस पर सालाना करीब 1200 करोड़ से ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च हो रही है। अधिक संख्या में भेड़ आयात कर मुहैया कराई गईं तो आगामी तीन से चार साल में राज्य महीन ऊन की आपूर्ति में सक्षम हो सकता है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री ने उक्त संबंध में केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय और पशुपालन डेयरी मंत्रालय को दिशा-निर्देश देने का अनुरोध किया है।

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