पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को मलाल है कि वह सूबे की सियासी पिच पर अपना स्वाभाविक खेल नहीं दिखा पा रहे

पूर्व मुख्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष हरीश रावत को मलाल है कि वह सूबे की सियासी पिच पर अपना स्वाभाविक खेल नहीं दिखा पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कि वह अपने स्वाभाविक खेल से प्रतिद्वंद्वियों को डिफेंसिव बना सकते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस जैसी बड़ी पार्टी में इतनी स्वतंत्रता किसी को दी जाएगी, इसे लेकर उन्हें संदेह है।प्रदेश कांग्रेस कमेटी इस माह की शुरुआत में परिवर्तन यात्रा का पहला चरण पूरा कर चुकी है। अब दूसरे चरण की तैयारी है। चार दिनी परिवर्तन यात्रा के दौरान ऊधमसिंहनगर जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों और नैनीताल के चार विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी बिगुल फूंकने के बाद हरीश रावत की इस टिप्पणी के सियासी निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। यात्रा से निपटते ही रावत जरूरी बैठक के सिलसिले में दिल्ली रवाना हो चुके हैं। इस बीच इंटरनेट मीडिया पर अपनी पोस्ट में उन्होंने कहा कि वह पहले चरण की यात्रा का और गहराई से विश्लेषण करेंगे। दूसरे चरण की समाप्ति के बाद उन्हें कहां खड़ा रहना चाहिए, इस बारे में भी वह अवश्य सोचेंगे।

भविष्य की रणनीति को लेकर चर्चाओं को हवा देते हुए उन्होंने कहा कि उनका आकस्मिक निर्णय आए, इससे पहले वह अपनी मनोस्थिति को पार्टी, पार्टी नेतृत्व के साथ बांट रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह कुछ सकारात्मक बिंदुओं के साथ पार्टी के लिए बड़ी संपदा साबित हो सकते हैं। पार्टी में उनके कुछ दोस्त उन्हें बंधनयुक्त रखना चाहते हैं। ऐसे में वह बहुत संभलकर खेले तो प्रतिद्वंद्वियों के पास सकारात्मक चीजें है, उनके चलते पार्टी की स्पष्ट जीत कठिन हो जाएगी। उन्होंने कहा कि वह बुरी तरह से चुनाव हारे। यही हार उनके लिए सकारात्मक स्थिति है। राज्य में बड़ी संख्या में लोग मानते हैं कि वह इस हार के लायक नहीं थे।उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में जन कल्याण व विकास की कई नई पहल कीं, वर्तमान सरकार ने उन्हें बंद कर दिया। एक बड़ा वर्ग वर्तमान सरकार की इस कारगुजारी से खिन्न है। तीसरी बात भाजपा के वर्तमान नेतृत्व वर्ग में किसी के पास राज्य के विकास की सोच का एक खाका तक नहीं है, जबकि उनकी सोच धरातल पर दिखाई देती है। लोग कहते हैं कि हरीश रावत के पास एक सोच थी। पूर्व मुख्यमंत्री ने 2016 में उनकी सरकार रहते हुए किए गए संघर्ष का भी जिक्र किया।

रावत ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के साथ परिवर्तन यात्रा के दौरान पार्टी के भीतर अंतर्विरोध पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि नए अध्यक्ष आने के बाद भी पार्टी की सांगठनिक दुर्बलता पर पार नहीं पाया जा सका है। यात्रा से जो ताकत मिली है, उसे सांगठनिक स्वरूप देना ही उनकी चिंता का विषय है। वर्तमान में संगठनात्मक कमजोरी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार 22 हजार पदों पर आवेदन मांगने का प्रपंच कर रही है। सरकार के पास इतना समय नहीं है कि नियुक्तियां कर सके। 2016 में आवेदन शुल्क लेने के बावजूद परीक्षाएं नहीं हो सकीं। सहकारिता और वन निगम में पद निकाले और उसके बाद भर्ती निरस्त करने का खेल हुआ। रोडवेज में यह खेल एक कदम आगे बढ़ गया। वहां आयोग से चयन हुआ, लेकिन नियुक्तियां नहीं हुईं। ऊर्जा निगमों में भर्तियां शुरू हो गईं, आधे पदों को निरस्त किया गया।कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने कहा कि वह 27 सितंबर को किसानों के भारत बंद का हिस्सा बनेंगे। इंटरनेट मीडिया पर अपनी पोस्ट में उन्होंने कहा कि भले ही किसान हमारा समर्थन चाहें या न चाहें, लेकिन कांग्रेस उनके साथ खड़ी है।

 

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