चमाली में आई आपदा के क्या थे मुख्य कारण व समाधन जाने पूरी खबर

उत्तराखंड के चमोली जिले की ऋषिगंगा घाटी में रविवार को हिमखंड के टूटने से अलकनंदा और इसकी सहायक नदियों में अचानक भयानक बाढ़ के चलते भारी तबाही मची है। बाढ़ के बाद करीब 50-100 लोग लापता बताए जाते हैं। कुछ शव मिले हैं जबकि कई लोगों को बचाया भी गया है। पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस प्राकृतिक आपदा के पीछे पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में इंसानी दखलंदाजी को बताया है। आइए जानें क्‍या है विशेषज्ञों की राय…

भारी निर्माण के कार्यों से बचा जाए  ग्रीनपीस इंडिया  के वरिष्ठ जलवायु एवं ऊर्जा प्रचारक अविनाश चंचल  ने कहा कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। यह घटना क्‍यों हुई इसकी ईमानदारी से जांच की जानी चाहिए लेकिन इतना साफ है कि पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में इंसानी दखलंदाजी बढ़ रही है। यह एक गंभीर कारक है जो क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक संवेदनशील बना रही है। चंचल ने यह भी कहा कि पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील इन क्षेत्रों में भारी निर्माण के कार्यों से बचा जाना चाहिए।एक अन्य विशेषज्ञ अंजल प्रकाश का कहना है कि तबाही के वजहों की व्याख्या करना अभी बहुत जल्दबाजी होगी। ऐसा लगता है कि ऐसा जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण हुआ है। यह संकेत है कि समस्‍या अब खतरनाक बन गई है। जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल की महासागरों पर विशेष रिपोर्ट के प्रमुख लेखकों में से एक अंजल प्रकाश कहते हैं कि चूंकि हिमालयी क्षेत्र सबसे कम निगरानी वाला क्षेत्र है ऐसे में इन क्षेत्रों पर नजर रखने में अधिक संसाधन खर्च करने की जरूरत है ताकि बड़ी तबाहियों से बचा जा सके।

इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) हैदराबाद में अनुसंधान निदेशक और एडजंक्ट एसोसिएट प्रोफेसर अंजल प्रकाश ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में हुई यह घटना दिखाती है कि हम कितने जोखिम में हैं। मैं सरकार से इस क्षेत्र की निगरानी में अधिक संसाधन खर्च करने की गुजारिश करूंगा ताकि क्षेत्र में हो रहे बदलावों के बारे में अधिक जानकारी हासिल हो सके। इसका नतीजा यह होगा कि हम इस क्षेत्र के बारे में अधिक जागरूक होंगे। यही नहीं निगरानी से हम बचाव की बेहतर स्थितियों को विकसित कर सकते हैं।वहीं आईआईटी इंदौर में सहायक प्रोफेसर (ग्लेशियोलॉजी एंड हाइड्रोलॉजी) मोहम्मद फारूक आजम कहते हैं कि हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियर का टूटना दुर्लभ घटना है। उपग्रह और गूगल अर्थ की तस्वीरों में इस क्षेत्र के पास कोई हिमनद झील नहीं नजर आ रही है। जलवायु परिवर्तन की वजह से अनियमित मौसम देखा जा रहा है। हिमालय पर बर्फबारी और बारिश में इजाफा हुआ है। चूंकि बहुत ज्‍यादा सर्दियां नहीं पड़ रही हैं इसलिए बर्फ तेजी से पिघलने लगी है। विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र के लिए विकास मॉडल पर फि‍र से विचार करने की दरकार है।

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