विद्युत अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के राज्यव्यापी आंदोलन की हड़ताल का असर दिखना शुरू

विद्युत अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के राज्यव्यापी आंदोलन की हड़ताल का असर दिखना शुरू हो गया है। सोमवार की रात 12 बजे से उत्तराखंड की महत्वपूर्ण मनेरी भाली प्रथम और द्वितीय जल विद्युत परियोजना में उत्पादन ठप कर दिया गया है। इससे राज्य सरकार को करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। वहीं, जिला मुख्यालय सहित जनपद के भटवाड़ी, पुरोला, नौगांव, बडकोट, चिन्यालीसौड़ सहित ग्रामीण क्षेत्रों पिछले एक घंटे से बिजली आपूर्ति ठप है। विद्युत कर्मचारियों की हड़ताल के कारण फाल्ट का भी पता नहीं चल पा रहा है। सुबह-सुबह बिजली गुल होने से स्थानीयजन खासे परेशान हो गए हैं।

भले ही उत्तरकाशी और आसपास के इलाकों में विद्युत आपूर्ति अभी सुचारू है, लेकिन किसी विद्युत लाइन में अगर फाल्ट आता है तो उस फाल्ट को सही होने के लिए उपभोक्ताओं को विद्युत कार्मिकों की हड़ताल समाप्त होने का इंतजार करना पड़ेगा।उत्तरकाशी जनपद में उत्तराखंड सरकार की भागीरथी पर निर्मित मनेरभाली जलविद्युत परियोजना 90 मेगावाट की है। इसका पावर हाउस उत्तरकाशी तिलोथ के पास है, जबकि भागीरथी नदी पर निर्मित मनेरीभाली जलविद्युत परियोजना द्वितीय 304 मेगावाट की है। राज्य सरकार की यह परियोजना सबसे महत्वपूर्ण है।

इस परियोजना का पावर हाउस चिन्यालीसौड़ धरासू के पास है। इन दोनों परियोजनाओं में हड़ताली जलविद्युत निगम के कार्मिकों ने उत्पादन ठप कर दिया है। विद्युत कर्मचारियों की प्रमुख मंगों में पेंशन बहाली, टाइम स्केल की व्यवस्था, उपनल और संविदा कर्मचारियों को समान कार्य का समान वेतन देने सहित कई मांगे हैं।ऊर्जा के तीन निगमों के 3500 से ज्यादा कार्मिकों ने सोमवार मध्यरात्रि से हड़ताल पर चले गए। एसीपी की पुरानी व्यवस्था की बहाली और समान काम के लिए समान वेतन समेत 14 सूत्रीय मांगों को लेकर शासन के साथ सोमवार पूरे दिन व देर रात्रि वार्ता जारी रहने के बावजूद समाधान की राह नहीं निकली। शासन ने मांगों को मानने के लिए मंगलवार को होने वाले कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव रखने का भरोसा भी दिया, लेकिन कार्मिकों ने इसे नाकाफी माना। हालांकि ऊर्जा सचिव सौजन्या ने कहा कि कर्मचारी संगठनों ने मंगलवार सुबह शासन के प्रस्ताव पर विचार करने का भरोसा दिया है।

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