80 % शरीर विकलांग होने के बाद भी समाज सेवा जज्बा कायम

विशम परिस्थितियों मैं विन्देष्वर कोठियाल ग्राम-कफोली विकासखण्ड-नारायण बगड़, जिला-चमोली, उत्तराखण्ड, का मूल निवासी है। जो विगत वर्शों से देहरादून में बड़ोवाला, निवास करता है। जिनकी 27 अक्टूबर, 2007 को एक सड़क दुर्घटना में रीड़ की हड्डी, सी, 6 एवं सी, 7 डिस ब्रेक हो गई थी यानी सर्वाइकल इंजरी हो गई थी, जिससे उनका पूरा शरीर सुन्न हो गया।

विन्देष्वर कोठियाल के षब्द! मेरी जिंदगी थम गई जिंदगी मेरे लिए कितनी भारी हो गई थी कि जिसकी में कल्पना भी नही कर सकता था। पूरे परिवार को लगा कि हम कभी हँस भी नहीं पायेगे लेकिन मेरी जीने की आस नही मरी, समय के साथ-साथ धीरे धीरे सब कुछ सामान्य होता गया एक विचार आया कि इस दर्द का कोई अंत नही है इसे सहना ही पड़ेगा तो अब इसे हंस कर सहूँ या रोकर तो हंसकर जीने का विकल्प चुन लिया। एक सवाल दिमाग मे कौंधा कि क्या मैं अकेला हूँ इस तरह की जिंदगी जीने वाला या और भी है। इस तरफ भी खोज खबर की तो कई लोग मिल गए उनसे बात की होंसला भी पाया और दिया भीए उन्हें भी अच्छा लगता मुझे भी लगता कि मैं अकेला नहीं हूँ मै सोचता था कि यदि मैं ठीक हुआ तो मैं इसी तरह के लोगों के लिए काम करूंगा इस दर्द को मेरे अलावा और कौन जान सकता है। दुर्भाग्य से मैं पूर्णरूप से ठीक तो नही हुआ लेकिन मैंने संकल्प को आगे बढ़ाने का फैसला लिया और इसके लिए मैने ठाँकर फाउंडेशन बनाया है। ठाँकर पेड़ से कटी एक शाखा होती है जब यह सूख जाती है तब इसका प्रयोग फल सब्जियों की बेलों को सहारा देने के लिए किया जाता है। यह मूलतः गढ़वाली शब्द है। ठाँकर की अपनी कुछ विशेषताएंे हैं यह पेड़ से सूखने कटने के बाद तथा खुद की जड़ न होते हुए भी दूसरों के लिए मजबूती से खड़ा रहता है उनका सहारा बनता है। अब प्रश्न यह उठता है कि क्या हम किसी के लिए ठाँकर बन सकते हैं,् मुझे विश्वास है कि मैं अपने मिशन में कामयाब होऊंगा। मैं कामयाब होने की बात इसलिए कह रहा हूँ कि जब मैं जिंदगी की इतनी बड़ी जंग लड़ सकता हूँ तो जीत भी सकता हूँ और आज कोविड-19 (कोरोना महामारी) में लगातार डेड महीने से मैंने खुद की पेंशन से और कुछ थोड़ी बहुत सहायता अपने मित्रों, भाई बन्दु, रिष्तेदार आदि से लेकर अभी तक जरूरतमन्द लोगों को सामग्राी देहरादून, टिहरी, हरिद्वार, रूड़की, चमोली के कुछ क्षेत्रों में वितरित की गयी, फल, 1000 कि0ग्रा0-आटा 500 कि0ग्रा0- चाँवल 350 कि0ग्रा0- दाल, चीनी, चायपत्ती, नमक, तेल वितरण कर लगभग 1000 से ज्यादा जरूरतमन्द लोगो को पक्का हुआ भोजन खिलाया है, लगभग 1000 से ऊपर मास्क वितरण, तथा एक निर्धन कन्या के विवाह हेतु खाद्य सामाग्री, व वस्त्र का इन्तजाम करके विवाह सम्पन्न करवाया।

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