उत्तराखंड राज्यपाल बेबी रानी मौर्य को पांचवें राज्य वित्त आयोग ने अपनी रिपोर्ट सौंपी

उत्तराखंड राज्यपाल बेबी रानी मौर्य को पांचवें राज्य वित्त आयोग ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। अब इसे विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा। विधानसभा की मंजूरी के बाद आयोग की सिफारिशों के अनुरूप प्रदेश के सभी 93 नगर निकायों (आठ नगर निगम, 43 नगर पालिका परिषद व 42 नगर पंचायत), 7791 ग्राम पंचायतों, 95 क्षेत्र पंचायतों और 13 जिला पंचायतों को अनुदान राशि दी जाएगी। साथ ही राज्य के करों में इसी हिसाब से निकायों के लिए हिस्सेदारी तय की जाएगी।

सरकार ने सेवानिवृत्त मुख्य सचिव इंदु कुमार पांडेय की अध्यक्षता में चार नवंबर 2019 को पांचवें राज्य वित्त आयोग का गठन किया। आयोग का कार्यकाल एक वर्ष निर्धारित था, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण इसे बढ़ाया गया। आयोग को पंचायतों व नगर निकायों की आर्थिक स्थिति की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपनी थी, लेकिन आयोग की गतिविधियां कोरोना के कारण बाधित होती रहीं। आयोग ने जिलों में पंचायत और निकायों के प्रतिनिधियों से सुझाव प्राप्त करने को जनसुनवाई का कार्यक्रम तय किया, लेकिन केवल चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में ही सुनवाई हो पाई।

बाद में वीडियो कांफ्रेंसिंग भी रूपरेखा बनाई गई, मगर कार्यालय बंद होने के कारण यह संभव नहीं हो पाया। इसे देखते हुए आयोग ने पंचायतों व निकायों से उनका मंतव्य, सुझाव और समस्याओं के संबंध में लिखित प्रतिवेदन मांगे। इसके आधार पर आयोग ने रिपोर्ट तैयार की। सोमवार को आयोग के अध्यक्ष इंदु कुमार पांडेय और सदस्य सचिव भूपेश चंद्र तिवारी ने राज्यपाल को पांच वर्षों (2021-22 से 2025-26) के लिए तैयार रिपोर्ट सौंपी। इसे सौंपने में करीब 16 माह का विलंब हुआ है।अब यह रिपोर्ट विधानसभा के पटल पर रखी जाएगी।

15 वें वित्त आयोग ने पूर्व में अपनी रिपोर्ट में कहा था जिन राज्यों ने राज्य वित्त आयोग का गठन नहीं किया है वे जल्द इनका गठन कर उनकी संस्तुतियों को क्रियान्वित करें और उसकी एक्शन टेकन रिपोर्ट विधानमंडल के समक्ष वर्ष 2024 से पहले प्रस्तुत करें। इस लिहाज से देखें तो उत्तराखंड की स्थिति बेहतर है। अब विधानसभा की मंजूरी मिलते ही आयोग की सिफारिशों के अनुरूप सरकार नगर निकायों व पंचायतों को अनुदान राशि उपलब्ध कराएगी।

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