उत्तराखंड में स्कूल खुलने के पहले दिन 40 से 50 प्रतिशत उपस्थिति रही

कोरोना की भयावह दूसरी लहर को हर किसी ने महसूस किया। बच्चे भी इससे अछूते नहीं थे। परिवार, रिश्तेदारी या कॉलोनी में पड़ोसी जब कोरोना से जूझ रहा था, तब विद्यार्थी घरों में सहमे थे। परीक्षाएं तक छूट गई। अब तीसरी लहर को लेकर चेताया जा रहा है। ऐसे वक्त में स्कूल खुलने के पहले दिन 40 से 50 प्रतिशत उपस्थिति रही। फूलचौड़ में 72 प्रतिशत बच्चे पहुंचे। विद्यार्थियों ने जता दिया कि वे कक्षा में पढऩा चाहते हैं। ऑनलाइन पढ़ाई विकल्प हो सकती है, लेकिन बेहतर सीखने के लिए स्कूल जरूरी है।फिलहाल नौवीं से 12वीं कक्षाओं के बच्चों को स्कूल बुलाया जा रहा है। हल्द्वानी में सरकारी व सहायता प्राप्त अशासकीय स्कूलों में कक्षाएं शुरू हो गई हैं। प्राइवेट स्कूल संचालकों ने विद्यालय बंद रखे हैं। शहर में अधिक छात्रसंख्या वाले स्कूल दो पाली में संचालित हो रहे हैं। जबकि कुछ स्कूलों ने कक्षावार अलग-अलग दिन बच्चों को बुलाया है। पहले दिन अपेक्षानुरूप अच्छी उपस्थिति रही। वहीं, बीईओ हरेंद्र मिश्रा ने बताया कि दो पालियों में स्कूल चलाने पर शनिवार को भी स्कूल खोलने का विकल्प रखा गया है।

कालाढूंगी रोड पर स्थित जीजीआइसी में पढ़ने वाली 11 वीं छात्रा पूजा बिष्ट ने कहा कि मोबाइल या फिर वर्कशीट से बेहतर पढ़ाई नहीं हो सकती। हां, यह जरूर है कि इससे पढ़ाई से जुड़ाव बना रहा है। स्कूल खुलने से खुश हूं। जबकि नेहा जोशी का कहना है कि स्कूल खुलने से पढ़ाई बेहतर हो सकेगी। पहले ही पढ़ाई का काफी नुकसान हो चुका है। कोरोना से बचाव के लिए हम हर उपाय अपना रहे हैं। आरती राजपूत ने बताया कि स्कूल खोलने का फैसला अच्छा है। स्कूल आने से अच्छी पढ़ाई हो सकेंगी। कई महीनों बाद अपने साथियों से मिलकर काफी अच्छा लग रहा।जीजीआइसी कालाढूंगी रोड की प्रधानाचार्य देवकी आर्या का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई का पहले ही काफी नुकसान हो चुका। इसे देखते हुए दो पाली में पढ़ाई कराई जा रही है। कोविड गाइडलाइन का पालन करा रहे हैं। खालसा बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य कमला सैन ने बताया कि छात्राओं की अधिक संख्या को देखते हुए एक कक्षा को सप्ताह में तीन दिन चलाने की तैयारी है। विभाग को स्कूल से कोविड सेंटर हटाने को लिख रहे हैं।

 

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