दून में समान रूप से बड़े निर्माण न हो सकें, इसके लिए बनाए गए फुटहिल जोन

दून में समान रूप से बड़े निर्माण न हो सकें, इसके लिए फुटहिल जोन (जहां पहाड़ व मैदान मिलते हैं) बनाए गए हैं। यहां भवनों की अधिकतम ऊंचाई 21 मीटर हो सकती है। इसके अलावा फुटहिल के साथ 30 डिग्री से अधिक ढाल वाले क्षेत्रों में भी भवन निर्माण के लिए नियम बनाए गए हैं। इसके बाद भी राजपुर रोड के ऊपरी क्षेत्रों से लेकर रायपुर, बिधौली आदि क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर निर्माण किए गए हैं। इन निर्माण की तरफ कभी एमडीडीए का ध्यान नहीं गया और तमाम निर्माण एमडीडीए ने स्वयं भी पास किए हैं। हालांकि, अब मनमाने निर्माण पर हाईकोर्ट ने भी संज्ञान लिया है। रेनु पॉल बनाम उत्तराखंड सरकार के मामले में हाईकोर्ट ने जवाब तलब किया तो अब एमडीडीए अधिकारी दौड़े-दौड़े फुटहिल क्षेत्रों का जायजा ले रहे हैं।

एमडीडीए के अध्यक्ष व मंडलायुक्त रविनाथ रमन और एमडीडीए उपाध्यक्ष रणवीर सिंह चौहान ने राजपुर रोड क्षेत्र में फुटहिल जोन का निरीक्षण किया। विशेषकर शिव मंदिर के पास एक बड़े निर्माण का मुआयना भी किया गया। बताया जा रहा है कि हाईकोर्ट में दायर याचिका में संबंधित निर्माण के चित्र भी लगाए गए हैं। एमडीडीए अधिकारियों के निरीक्षण के क्रम में राजपुर रोड व इसके ऊपर के विभिन्न क्षेत्रों में भवन स्वामियों को दर्जनों नोटिस भी जारी कर दिए गए हैं। नोटिस में भवन स्वामियों से स्वीकृत नक्शे की प्रति व कंटूर (ऊंचाई वाले स्थलों का माप) मैप भी मांगे गए हैं। एमडीडीए के नोटिस से भवन स्वामियों में हड़कंप की स्थिति है। जिन व्यक्तियों ने मैप पास कराया है, वह कंटूर मैप को लेकर असमंजस में हैं। क्योंकि स्वयं एमडीडीए ने भी उनसे पहले कंटूर मैप नहीं मांगा।

फुटहिल क्षेत्रों के निरीक्षण के क्रम में एमडीडीए नोटिस जारी कर स्वीकृत नक्शा व कंटूर मैप मांग रहा है। इससे यह सवाल खड़ा होता है कि यदि एमडीडीए ने निर्माण को स्वीकृति दी है तो यह रिकॉर्ड पहले से कार्यालय में होना चाहिए। यदि निर्माण को स्वीकृति नहीं दी तो एमडीडीए अधिकारी अब तक क्या कर रहे थे।

हाईकोर्ट के आदेश के क्रम में एमडीडीए उपाध्यक्ष रणवीर सिंह चौहान ने सभी फुटहिल क्षेत्रों का सर्वे कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए आठ अभियंताओं की समिति बनाई गई है।

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