जंगल की आग से परेशान वन महकमे; जाने पूरी खबर

जंगल की आग से परेशान वन महकमे की समझ में भी यह बात आने लगी है। अब तक झांपे पर निर्भर रहने वाले महकमे ने आधुनिक उपकरणों की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। पहली मर्तबा वनों की आग पर नियंत्रण के लिए लीफ ब्लोअर का उपयोग सफल रहा है। कार्बेट व राजाजी टाइगर रिजर्व के अलावा देहरादून, हरिद्वार, कालसी, नैनीताल समेत अन्य वन प्रभागों में करीब 50 लीफ ब्लोअर इस्तेमाल में लाए जा रहे हैं। इनके बेहतर नतीजों को देखते हुए सभी वन प्रभागों में इनकी उपलब्धता के प्रयास शुरू किए गए हैं। वन विभाग के मुखिया प्रमुख मुख्य वन संरक्षक राजीव भरतरी के अनुसार इस बारे में प्रस्ताव मांगे गए हैं। इसके अलावा आपदा प्रबंधन विभाग से भी संवेदनशील क्रू-स्टेशनों के लिए 482 लीफ ब्लोअर मुहैया कराने का आग्रह किया गया है।

प्रदेश में जंगलों की आग पर नियंत्रण के लिए आज भी सबसे कारगर हथियार झांपा (पत्तीयुक्त हरी टहनियों को तोड़कर बनाया जाने वाला झाड़ू) ही है। हालांकि, अब धीरे-धीरे आग बुझाने के लिए आधुनिक उपकरणों की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। देश के विभिन्न राज्यों में आग बुझाने के लिए लीफ ब्लोअर का प्रयोग सफल रहने के बाद वर्ष 2017 में राजाजी टाइगर रिजर्व में इसका ट्रायल सफल रहा था। इसके बाद राजाजी व कार्बेट टाइगर रिजर्व समेत कुछ प्रभागों में प्रयोग के तौर पर लीफ ब्लोअर खरीदे गए।

इस मर्तबा आग ने विकराल रूप धारण किया तो संबंधित प्रभागों में लीफ ब्लोअर का उपयोग किया गया। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जेएस सुहाग के अनुसार राजाजी व कार्बेट टाइगर रिजर्व में लीफ ब्लोअर से आग बुझाने में ज्यादा सुगमता आई है। हरिद्वार के डीएफओ नीरज शर्मा ने बताया कि हरिद्वार प्रभाग में आठ लीफ ब्लोअर खरीदे गए हैं। श्यामपुर व हरिद्वार रेंज में यह काफी प्रभावी रहे हैं। एक लीफ ब्लोअर से एक घंटे में एक किलोमीटर तक फायर लाइन की सफाई करने के साथ ही नई फायर लाइन काटी जा सकती है। आग पर नियंत्रण में एक लीफ ब्लोअर का उपयोग पांच व्यक्तियों के बराबर होता है।

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