उत्तराखंड को वैट की जगह जीएसटी लागू होने से नुकसान बढ़कर 3000 करोड़ को पार

आमदनी के सीमित संसाधनों से जूझ रहे उत्तराखंड को वैट की जगह जीएसटी लागू होने से नुकसान बढ़कर 3000 करोड़ को पार कर गया है। घाटे की ये स्थिति तब है, जब जीएसटी लागू होने से राज को हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र सरकार मुआवजा दे रही है। जून 2022 के बाद केंद्र सरकार ने मुआवजा आगे जारी नहीं रखा तो राज्य के सामने संकट जैसे हालात होंगे। राज्य को सीधे तौर पर 3200 करोड़ से ज्यादा का घाटा उठाना पड़ेगा।उत्तराखंड के लिए आमदनी में सबसे बड़ी हिस्सेदारी एक जुलाई, 2017 से पहले वैट की रही है। इसके बाद जीएसटी लागू होने से राज्य की कर आमदनी में हर साल होने वाली वृद्धि बुरी तरह प्रभावित हुई है। जीएसटी लागू होने से पहले 2016-17 में राज्य की वैट से 7093 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। अगले वर्ष 2017-18 में वैट लागू रहने की स्थिति में इससे होने वाली आमदनी बढ़कर 8648 करोड़ होती। जीएसटी लागू होने के बाद राज्य को केंद्र से मुआवजा मिलने के बावजूद महज 7784 करोड़ की आय पर संतोष करना पड़ा है। इसमें भी राज्य जीएसटी और पेट्रोल-डीजल पर वैट को मिलाकर कुल 5683 करोड़ प्राप्त हुए। शेष 2101 करोड़ बतौर जीएसटी मुआवजा केंद्र ने दिए।केंद्र सरकार ने जीएसटी से मुआवजा की समय अवधि पांच वर्ष रखी है। यह अवधि जून, 2022 में खत्म हो जाएगी। जीएसटी मुआवजे के लिए केंद्र ने समय सीमा आगे नहीं बढ़ाई तो राज्य को चालू वित्तीय वर्ष में जीएसटी से होने वाली 13,492 करोड़ की कुल आमदनी अगले वित्तीय वर्ष में घटकर 10,194 करोड़ तक हो जाएगी। इसके बाद आने वाले वित्तीय वर्षों में इसमें और गिरावट तय है। इससे राज्य सरकार चिंतित है।

यही वजह है कि बीते दिनों जीएसटी काउंसिल की बैठक में राज्य सरकार ने जीएसटी मुआवजा की अवधि बढ़ाने की पुरजोर पैरवी की।सुबोध उनियाल (सरकार के प्रवक्ता व कैबिनेट मंत्री उत्तराखंड) का कहना है कि उत्तराखंड के पास आमदनी के संसाधन बेहद सीमित हैं। वैट लागू होने से राज्य की कर आमदनी में अच्छी-खासी वृद्धि हो रही थी। जीएसटी लागू होने के बाद राज्य को कर आमदनी में नुकसान उठाना पड़ रहा है। जीएसटी क्षतिपूर्ति जून, 2022 के बाद आगे जारी नहीं रहने पर राज्य की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। इस वजह से जीएसटी काउंसिल की बैठक में मुआवजा को अगले पांच वर्षों तक बढ़ाने की पैरवी की गई है।राज्य में आय बढ़ाने को लेकर गंभीर कदम नहीं उठाए जाने का परिणाम ये हुआ कि खर्च बढ़ने की दर आमदनी की तुलना में तेजी से बढ़ गई। कोरोना महामारी में खर्च में कमी नहीं आई, अलबत्ता आमदनी घट गई। करों से मिलने वाली आय पर कोरोना महामारी ने भी कहर ढाया है। दो साल से करों से मिलने वाली आमदनी लगातार कम होती गई है। 10-20 करोड़ की आमदनी बढ़ाने के लिए खासी जिद्दोजहद करने वाले उत्तराखंड को 31 मार्च 2019 से लेकर 31 मार्च 2021 तक 1397 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ा है।

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