11 से 20 फरवरी तक स्थानीय किसानों को जैविक सेब उत्पादन का सिखाएंगे हुनर हिमाचल के बागवान

हिमाचल के बागवान 11 से 20 फरवरी तक स्थानीय किसानों को जैविक सेब उत्पादन का हुनर सिखाएंगे। सुप्रसिद्ध चौबटिया गार्डन को टक्कर दे हिमालयी राज्य में मॉडल बन एप्पलमैन के नाम से विख्यात गोपाल उप्रेती के बिल्लेख घाटी (रानीखेत) का आर्गेनिक बगीचा काश्तकारों की पाठशाला बनेगा। इस बीच उन्नत नस्ल के हिमाचली सेब के पौधे देकर किसानों में प्रतिस्पद्र्धा भी कराई जाएगी।  बिल्लेख घाटी के जैविक सेब की धाक दिल्ली की मंडी तक है। प्रवासी गोपाल उप्रेती ने वर्ष 2016 में बिल्लेख गांव लौट राज्य सरकार की मिशन एप्पल योजना से पहले खुद को जोड़ा। 40 नाली से बागवानी की शुरुआत की। अब गोपाल का बागान तीन एकड़ में है। यहां 75 फीसद हिमाचली व शेष 25 में उद्यान विभाग की रेडडेलिसियस प्रजाति बेहतर पैदावार दे रही है।

हिमाचल के प्रूनिंग विशेषज्ञ विपुल शर्मा व साथी बागवान यहां के किसानों को प्रूनिंग यानी विशेष कटाई छंटाई की बारीकी बताएंगे। गोपाल उप्रेती के अनुसार प्रूनिंग का बेहतर उत्पादन में बड़ा हाथ होता है। पर इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता। प्रशिक्षण में शामिल 50 किसानों को इस विधि की विशेष जानकारी दी जाएगी।  गोपाल उप्रेती को वर्ष 2016 में उद्यान पंडित पुरस्कार मिला। बीते वर्ष लॉकडाउन के दौरान जैविक खेती के क्षेत्र मेंं सबसे ऊंचा धनिया का पौधा 2.285 मीटर (7.6 फीट) उगाने पर इनका नाम गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हुआ।

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