आज के दौर में मोटापा केवल ज्यादा खाने या जंक फूड का परिणाम नहीं है, बल्कि हमारी रोजमर्रा की आदतें भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्याप्त नींद न लेना, लगातार तनाव में रहना और शारीरिक गतिविधि की कमी—ये तीन बड़े कारण हैं जो धीरे-धीरे वजन बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
कानपुर स्थित Apollo Spectra Hospitals में सीनियर कंसल्टेंट (जनरल एंड लेप्रोस्कोपिक सर्जरी) डॉ. वैभव गुप्ता के अनुसार, एक वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लेना जरूरी है। जब शरीर को पर्याप्त नींद नहीं मिलती, तो भूख नियंत्रित करने वाले हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं। इसके कारण व्यक्ति को बार-बार भूख लगती है और वह अधिक कैलोरी का सेवन कर लेता है। देर रात तक मोबाइल और लैपटॉप का उपयोग भी मेटाबॉलिज्म पर नकारात्मक असर डालता है।
मानसिक तनाव भी मोटापे का एक बड़ा कारण है। तनाव के दौरान शरीर में ‘कॉर्टिसोल’ हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो शरीर को ऊर्जा बचाने और फैट जमा करने के लिए प्रेरित करता है, खासकर पेट के आसपास। तनाव की स्थिति में कई लोग इमोशनल ईटिंग का शिकार हो जाते हैं और मीठा या तला-भुना भोजन अधिक मात्रा में लेने लगते हैं।
इसके अलावा, आज की बैठकर काम करने वाली जीवनशैली में शारीरिक गतिविधि की कमी भी वजन बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने से शरीर उतनी कैलोरी खर्च नहीं कर पाता, जितनी हम खाते हैं। अतिरिक्त कैलोरी शरीर में चर्बी के रूप में जमा हो जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नींद की कमी, तनाव और निष्क्रिय जीवनशैली एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। कम नींद से तनाव बढ़ता है, तनाव से ज्यादा खाने की आदत बनती है और थकान के कारण शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है। ऐसे में केवल डाइटिंग से वजन कम करना मुश्किल हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रोजाना 7–8 घंटे की नींद लें, सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करें, तनाव कम करने के लिए योग या मेडिटेशन अपनाएं और सप्ताह में कम से कम पांच दिन 30 मिनट तक नियमित व्यायाम करें। समय रहते इन आदतों में सुधार कर लिया जाए तो न केवल वजन नियंत्रित रहेगा, बल्कि डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग जैसी बीमारियों का खतरा भी कम किया जा सकता है।

