ढाका, जनवरी 2026: बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में भारी वृद्धि दर्ज की जा रही है, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति और मानवाधिकार संकट गहराता जा रहा है। अल्पसंख्यक नेताओं का कहना है कि नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार सुरक्षा देने में विफल रही है, और सरकार की निष्क्रियता से अपराधियों के हौसले बुलंद हो गए हैं।
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने बयान जारी कर कहा है कि अल्पसंख्यक डर और अनिश्चितता में जी रहे हैं, और इन हमलों का उद्देश्य समुदाय को भयभीत कर आने वाले चुनाव में स्वतंत्र रूप से वोट देने से रोकना हो सकता है। उन्होंने कहा कि देश भर में सुरक्षा उपायों का कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है और कमजोर समुदायों के लिए कोई आपातकालीन सुरक्षा योजना नहीं है।
हिंसा के बीच 8 सदस्यीय अल्पसंख्यक नेताओं का प्रतिनिधिमंडल हाल ही में BNP के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान से ढाका में मिला। प्रतिनिधिमंडल में हिंदू, बौद्ध, ईसाई समुदायों एवं कल्याणकारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे।
प्रतिनिधिमंडल ने रहमान को हिंसा और अल्पसंख्यकों में व्याप्त भय के बारे में विस्तार से बताया। तारिक रहमान ने कहा कि कानून-व्यवस्था बहाल करना आवश्यक है और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि धर्म या जातीयता के आधार पर किसी के अधिकार से समझौता न हो।
मानवाधिकार पर्यवेक्षकों ने चेतावनी दी है कि मौजूदा स्थिति कानून-व्यवस्था के पतन को दर्शाती है। ढाका में एक वरिष्ठ सामुदायिक आयोजक ने कहा, “सरकार की चुप्पी और निष्क्रियता अपराधियों को बढ़ावा दे रही है। तत्काल हस्तक्षेप के बिना यह हिंसा बढ़ेगी।”
विशेषज्ञों ने कहा है कि बांग्लादेश एक अहम राजनीतिक मोड़ पर खड़ा है, और अल्पसंख्यकों पर जारी उत्पीड़न केवल मानवाधिकार संकट ही नहीं, बल्कि अंतरिम सरकार की वैश्विक विश्वसनीयता की परीक्षा भी है।
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के अनुसार सिर्फ दिसंबर 2025 में ही अल्पसंख्यकों के खिलाफ कम से कम 51 हिंसा की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें शामिल हैं:
- 10 हत्याएं
- 23 मामले लूटपाट और आगजनी के
- 10 मामले डकैती और चोरी के
- 4 झूठे ईशनिंदा आरोपों में हिरासत और यातना के मामलों
- 1 बलात्कार का प्रयास
- 3 शारीरिक हमले
इन हमलों में अल्पसंख्यक समुदायों के घर, मंदिर और व्यवसाय भी निशाने पर रहे।
जनवरी 2026 में भी इन घटनाओं की लहर नहीं रुकी:
- 2 जनवरी: लक्ष्मीपुर में सत्यरंजन दास की धान फसल में आग
- 3 जनवरी: व्यवसायी खोकन चंद्र दास पर हमला; चटोग्राम और कुमिल्ला में डकैती
- 4 जनवरी: शुभो पोद्दार की दुकान से सोने के गहने लूट; झेनैदाह में 40 वर्षीय हिंदू विधवा महिला के साथ गैंगरेप और यातना
- 5 जनवरी: जशोर में आइस फैक्ट्री मालिक रामा प्रताप बैरागी की गोली मारकर हत्या; नरसिंगदी में किराना दुकान मालिक मोनी चक्रवर्ती की चाकू मारकर हत्या
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने कहा है कि कई और घृणास्पद घटनाएं भी हुई हैं, जिनकी रिपोर्ट अभी तक दर्ज नहीं की गई है, जिससे हिंसा की स्थिति और भी भयावह प्रतीत हो रही है।
विश्लेषक मानते हैं कि चुनाव नजदीक आते ही सांप्रदायिक हिंसा में वृद्धि, अल्पसंख्यकों के खिलाफ भय और सरकार की निष्क्रियता देश की सामाजिक एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए गंभीर खतरा बन रहे हैं।
