अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 28 जनवरी को ईरान को कड़ा संदेश भेजते हुए कहा कि तेहरान को जल्द ही परमाणु समझौते पर बातचीत के लिए तैयार होना चाहिए, अन्यथा अगली अमेरिकी कार्रवाई पहले से भी अधिक गंभीर होगी। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत कर रहा है और क्षेत्र में 美国 का “आर्माडा” (मज़बूत नौसैनिक बेड़ा) ईरान की ओर बढ़ रहा है, जिससे तेहरान पर दबाव बढ़ गया है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने स्पष्ट कहा है कि ईरान ने अमेरिका से बातचीत का कोई अनुरोध नहीं किया है, और धमकियों के माहौल में कोई बातचीत संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर संयुक्त राज्य अपनी धमकियों को हटाए तभी किसी बातचीत पर विचार किया जा सकता है।
अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln सहित युद्धपोत पहले ही मध्य पूर्व पहुंच चुके हैं, जो बढ़ते तनाव का संकेत हैं। इसके साथ ही अमेरिका ने कुछ सैन्य संसाधनों की तैनाती और भी बढ़ाई है ताकि किसी संभावित संघर्ष से पहले तैयारी रहे।
ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका कोई भी सैन्य कार्रवाई करता है तो वह इसे “पूरा युद्ध” समझेगा और कड़ी प्रतिक्रिया देगा। यह बयान तनावपूर्ण स्थिति को और बढ़ा रहा है।
लेबनन की शिया समूह हिज़बोल्लाह ने भी अमेरिका के बढ़ते कदमों पर चिंता जताई है और कहा है कि अगर ईरान पर हमला हुआ तो उसके प्रभाव पूरे क्षेत्र पर पड़ सकते हैं।
📌 स्थिति का सार:
• ट्रंप ने ईरान को बातचीत की चेतावनी दी, साथ ही सैन्य विकल्प खुले रखे हैं।
• ईरान ने साफ़ कहा कि उसने बातचीत नहीं मांगी और धमकियों में कोई डील नहीं होगी।
• अमेरिका ने सैन्य तैनाती बढ़ाई है, जबकि ईरान ने जवाब में संभावित “पूर्ण युद्ध” की चेतावनी दी है।
• क्षेत्रीय ताकतें एवं सहयोगी देश स्थिति पर सतर्क हैं।

