दुबई/मिडिल ईस्ट। ईरान ने खाड़ी देशों और अमेरिका के सहयोगी देशों पर लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले करके दशकों से बनाए गए सुरक्षा भरोसे को चुनौती दे दी है। ईरानी हमलों का मुख्य संदेश यह है कि जो भी देश अमेरिकी सेना को अपने क्षेत्र में हमला करने की अनुमति देता है, उसे कोई सुरक्षा नहीं दी जाएगी।
ईरानी हमलों का दायरा
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, कुवैत और बहरीन में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन से हमले किए।
- दुबई में फाइव-स्टार होटलों, इंटरनेशनल एयरपोर्ट और पाम जुमेराह जैसे प्रतिष्ठित इलाकों में सीधे मिसाइलें गिरी।
- UAE के रक्षा मंत्रालय के अनुसार अब तक 540 से अधिक ड्रोन, 165 बैलिस्टिक मिसाइल और 2 क्रूज मिसाइल हमले में शामिल रही हैं।
मानव और संपत्ति पर असर
- UAE, कुवैत, कतर, बहरीन और ओमान में हमलों में कम से कम 4 आम लोग मारे गए और 100 से अधिक घायल हुए।
- दुबई के कुछ रिहायशी इलाकों में मिसाइल मलबा गिरने से संपत्ति को मामूली नुकसान हुआ।
- सऊदी अरब में रास तनुरा रिफाइनरी पर ड्रोन हमला हुआ, जिससे कुछ समय के लिए देश की प्रमुख तेल उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई।
- साइप्रस के अक्रोटिरी में ब्रिटेन के रॉयल एयर फोर्स बेस पर भी ड्रोन हमला हुआ।
अमेरिका और खाड़ी देशों की स्थिति
- कुवैत में अमेरिकी अड्डे पर हमले में अमेरिकी सेना के तीन जवान मारे गए।
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि युद्ध अगले 4–5 हफ्तों तक जारी रह सकता है।
- खाड़ी के देश, जिन्हें दशकों से अमेरिकी सुरक्षा की छत्रछाया में सुरक्षित माना जाता था, अब इस भरोसे को खोते दिख रहे हैं।
दुबई की प्रतिक्रिया
- दुबई, जो अपनी लग्जरी और सुरक्षा के लिए जाना जाता है, इस हमले से हिला है।
- पाम जुमेराह स्थित आलीशान फेयरमोंट होटल और बुर्ज अल अरब के पास धमाके सुने गए।
- जेबेल अली पोर्ट और अल मिन्हाद एयर बेस सहित प्रमुख सैन्य और शिपिंग हब पर भी हमले दर्ज किए गए।
हाल के वर्षों में UAE ने ईरान के साथ सतर्क कूटनीतिक संबंध बनाए रखा था, लेकिन इस युद्ध ने खाड़ी देशों की बैलेंसिंग नीति को चुनौती दी है। ईरानी हमलों ने स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका के सहयोग से भी किसी देश की सुरक्षा को पूर्ण माना नहीं जा सकता।
निष्कर्ष: मिडिल ईस्ट में इस तरह के सैन्य संघर्ष ने क्षेत्रीय स्थिरता को गंभीर चुनौती दी है, और स्थानीय नागरिकों तथा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति दोनों पर प्रभाव पड़ा है।

